पर्यावरण संरक्षण के लिए स्कूलों ने नयी पहल शुरू की है। कागज के प्रयोग को कम करने के लिए छात्रों को प्रोजेक्ट दिए गए हैं। पेपर लेस वर्क के लिए डाटा को ऑनलाइन रखना शुरू किया है। स्टाफ की हाजिरी भी रजिस्टर की जगह, कंप्यूटर पर फीड की जा रही है।
छात्रों की पूरी जानकारी भी ऑनलाइन सेव की जा रही है, ताकि कम से कम कागज का प्रयोग किया जाए। इससे कागज तो बचेगा ही, साथ ही पर्यावरण का संरक्षण भी होगा। सीबीएसई ने भी पूरा डाटा ऑनलाइन रखने के आदेश दिए हैं। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में हो रहे कार्य से रूबरू कराती रिपोर्ट।
पेपर रिसाइकलिंग की शपथ ली
सोफिया गर्ल्स स्कूल में छात्राओं ने पेपर रिसाइकलिंग क ी शुरुआत की है। छात्राओं ने हर क्लासरूम में बिन रखे हैं। छात्राएं क्लास में जो भी वेस्ट पेपर निकालती हैं, उसे इस बिन में कलेक्ट किया जाता है। महीने में सभी क्लासेस में रखे बिन में जितना भी पेपर इकट्ठा होता है, उस कागज को पेपर मिल में रिसाइकलिंग कराकर फ्रेश पेपर की नोटबुक तैयार कराई जा रही हैं। ये गरीब बच्चों को बांटी जा रही हैं।
ईवीएस का हिस्सा बनी पेपर सेविंग
आर्मी पब्लिक स्कूल में पेपर सेविंग को ईवीएस का हिस्सा बना दिया है। स्कूल में छात्रों को वेस्ट पेपर को फेंकने के बजाय उसका प्रयोग करना सिखाया जाता है। छात्रों को पुराने और बेकार कागज को फेंकने के बजाय उससे उपयोगी और सजावटी सामान बनवाए जाते हैं, ताकि जो सामान बनाने में नए मैटेरियल का प्रयोग हो उस कॉस्ट को बचाकर वेस्ट पेपर से ही अच्छा सामान बनाया जा सके।
पुराने पेपर को करते हैं रीयूज
सेंट जोंस स्कूल में पिछले दो महीने से छात्रों को पेपर रीयूज करने पर जोर दिया जा रहा है। छात्रों के बीच डिसप्ले प्रतियोगिता कराकर छात्रों को पेपर बचाने की जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा प्रिंटआउट के पेपर्स व कॉपियाें के बचे पेज को रद्दी में फेंकने के बजाय उनसे नई नोटबुक बनाकर उसे इस्तेमाल कराया जाता है। रफ वर्क के रूप में बच्चे पुराने बचे पेज व वनसाइड प्रिंट पेज को यूज करते हैं।
बीएसई भी दे रहा जोरसी
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड स्वयं स्कूलों को अपना डाटा ऑनलाइन करने के निर्देश दे चुका है। सीबीएसई ने इस साल से स्कूलों में बच्चों के एडमिशन के वक्त ही उनकी सारी डिटेल ऑनलाइन भेजने के निर्देश दिए थे। साथ ही पुराने छात्रों का डाटा ऑनलाइन पोर्टल पर मांगा है, ताकि बोर्ड एग्जाम में छात्र की डिटेल ऑनलाइन रहे। स्कूल सभी छात्रों से उनकी ईमेल आईडी क्रिएट करवा रहे हैं, साथ ही सारी डिटेल भी ऑनलाइन ले रहे हैं। इसके बाद भी स्कूलों ने ऑनलाइन डाटा की गतिविधि बढ़ा दी है।
पेपर सेविंग और सुविधा दोनों
छात्रों का डाटा ऑनलाइन करने का प्रमुख उद्देश्य पेपर का कम से कम प्रयोग है, ताकि पेपर की बचत हो इससे पर्यावरण सुरक्षा भी की जा सके। इसके अलावा संबंधित डाटा को स्कूल हेड कहीं भी बैठकर ऑनलाइन देख सकते हैं। स्कूल पेपर लेस ऑनलाइन वर्क को तवज्जो दे रहे हैं। सीबीएसई ने भी बोर्ड एग्जाम के कारण छात्रोें की परफार्मेंस अभिभावक घर बैठे देख सकें, इसलिए डिटेल ऑनलाइन एकत्र करना शुरू किया है।
शहर के स्कूल और छात्रों की संख्या
स्कूल स्कूल संख्या छात्र संख्या
पब्लिक स्कूल 200 5 लाख
केंद्रीय विद्यालय 3 10 हजार
आइसीएसई विद्यालय 5 12 हजार
स्कूल में स्टूडेंट्स का डाटा ऑनलाइन किया है। साथ ही हर महीने सभी क्लासेस में पेपर सेविंग एक्टिविटी कराते हैं। इसमें बोर्ड डिजायन, डिस्प्ले कांटेस्ट आदि करते हैं। - चंद्रलेखा जैन, प्रिंसिपल सेंट जोंस स्कूल
स्कूल में स्टाफ और स्टूडेंट्स सभी का डाटा ऑनलाइन किया है। सीबीएसई ने भी निर्देश दिए हैं, ताकि कम से कम पेपर इस्तेमाल करके पेपर सेविंग हो सके। - डॉ. रीटा गुप्ता, प्रिंसिपल आर्मी पब्लिक स्कूल
स्कूल स्टाफ की सारी डिटेल्स हमने ऑनलाइन की है। तकनीकी तौर पर साउंड होने और पेपर वर्क कम करने के लिए ऑनलाइन का इस्तेमाल बढ़ाया है। जल्द ही बायोमेट्रिक सिस्टम से अटेंडेस शुरू कराने जा रहे हैं।
- डॉ. मृणालिनी अनंत, प्रिंसिपल एमपीजीएस शास्त्रीनगर
स्कूल के सभी छात्रों की पर्सनल ईमेल आइडी बनाकर उनकी डिटेल ऑनलाइन की है। सीबीएसई की भी यही गाइडलाइन है। एनवायरमेंट सेविंग के लिए भी यह कदम उठाया है।
- एचएम राउत, प्रिंसिपल दीवान पब्लिक स्कूल