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विकास में हांफ गया ‘मास्टर प्लान’ 

Mon, 04 Jul 2016 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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टूटी पड़ी सड़क। - फोटो : अमर उजाल
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दिल्ली से सटे एनसीआर के महत्वपूर्ण शहर मेरठ का समुचित, सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास करने में मास्टर प्लान हांफ गया है। मेरठ महायोजना 2021 के दूसरे चरण का भी आधा समय गुजर चुका है, लेकिन कोई काम पूरा नहीं हुआ है। कई प्रोजेक्ट तो ऐसे हैं जो शुरू भी नहीं हो पाए हैं। अगले पांच साल इन पर काम करने के लिए एडी से चोटी तक का जोर लगाना होगा। कई प्रस्ताव तो ऐसे हैं जिन्हें पूरा करना अब नामुमकिन सा हो गया है।
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वर्ष 2004 में बनी थी मेरठ महायोजना 
मेरठ महायोजना 2021 वर्ष 2004 में बनी थी। काम भले ही 2004 से शुरू होना था पर मास्टर प्लान लेट हो गया और योजना का नोटिफिकेशन 2006 में हुआ। दो चरणों में इस योजना के शहर के विकास का मसौदा तैयार किया गया। पहला चरण वर्ष 2004 से 2011 तक और दूसरा चरण वर्ष 2012 से 2021 तक तक है।

इन प्रस्तावों पर काम ही नहीं 
इनर रिंग रोड अटकी  
शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु करना मेरठ महायोजना का बड़ा हिस्सा था। सुनकर ताज्जुब होगा कि महायोजना की 50 प्रतिशत से ज्यादा सड़कों पर काम ही नहीं हो पाया। इनर रिंग रोड जैसे मार्ग इनमें प्रमुख हैं। योजना का दूसरा चरण भी पूरा हो गया, लेकिन इनर रिंग रोड पर काम पूरा ही नहीं हुआ। कहीं कहीं एमडीए और आवास विकास परिषद की योजना में रोड बनी है, लेकिन बाकी हिस्से में अधूरी है। 
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आउटर रिंग रोड से हाथ खड़े किए 
आउटर रिंग रोड हवा में उड़ गई। शहर की तरफ प्रवेश करने वाले सभी मुख्य मार्गों को शहर के बाहर ही जोड़ने के लिए  मेरठ में 70  किमी की आउटर रिंग रोड मेरठ महायोजना में प्रस्तावित है। यह दिल्ली रोड से हापुड़ रोड, वहां से मवाना रोड, रुड़की रोड और फिर दिल्ली रोड पर आकर मिलेगी। रोड को दो लेन बनाने का प्रस्ताव है। एनएच 58 पर एक तरफ यह मोहिउद्दीनपुर के पास तो दूसरी तरफ दौराला के पास क्रास कराने का प्लान है। यह प्लान भी हवा में उड़ गया। एमडीए ने इस रोड को बनाने से ही हाथ खड़े कर दिए।

अन्य सड़कों का भी बुरा हाल 
लावड़ रोड चौड़ी होनी थी, लेकिन यह भी अटक गई। यहां निर्माण हो चुके हैं। बिजली बंबा बाईपास से सीधा शताब्दीनगर में हवाई पट्टी को जोड़ने वाली रोड को जोड़ना था,  इसे जोड़ा नहीं जा सका है। जुर्रानपुर फाटक हवा में अटका है।

नहीं हटीं डेयरियां
मेरठ महायोजना में उद्योगों के लिए भी अलग से प्लान बना था। कहा यह गया था कि शहर से डेयरियाें को बाहर कर अलग से विकसित किया जाएगा। डेयरियों को लेकर तो हाईकोर्ट भी सख्ती दिखा चुका है, लेकिन डेयरी बाहर नहीं हो पा रही हैं। कई बार इसके लिए आवाज उठी। डेयरी संचालकों ने सस्ती दर पर जमीन मांगी पर न जमीन दी गई और न ही डेयरियां शिफ्ट हो पाईं।

बस अड्डे भी नहीं हुए शिफ्ट 
महायोजना में नए बस अड्डे बनाना और पुराने बस अड्डों को शिफ्ट करने का भी प्लान था। यह काम भी नहीं हुआ। ताज्जुब की बात यह है कि महायोजना में शामिल किए गए सेटेलाइट बस अड्डे का प्रस्ताव भी गिर गया और उसके लिए सुरक्षित जमीन पर अब आवासीय कॉलोनी के लिए भूखंड आवंटन कर दिया गया। भैंसाली बस अड्डे को शिफ्ट करने की सभी कवायद धड़ाम हो गई। यही हाल सोहराब गेट बस अड्डे को शिफ्ट करने का भी है। हालांकि दोनों के लिए जगह तलाशी जा रही है, लेकिन यह काम कब तक होगा किसी को नहीं पता। 

आवासीय कॉलोनियां भी अधूरी 
महायोजना में आवासीय कालोनियों का जाल बिछना था। यहां मेरठ विकास प्राधिकरण ने कई योजनाओं में काम भी किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। शताब्दीनगर, वेदव्यासपुरी, लोहियानगर, गंगानगर में पूर्ण विकास नहीं हो पाया। न्यू टाउनशिप तक पर काम नहीं हो सकता और यह प्रस्ताव गिर गया।

अवैध कॉलोनियों का जाल
एमडीए और आवास विकास परिषद ने सही एवं बेहतर कॉलोनियों का विस्तार नहीं किया तो निजी कालोनाइजरों की बल्ले बल्ले हो गई। शहर में अवैध कालोनियों का जाल फैल गया। महायोजना के पीरियड में ही सौ से ज्यादा अवैध कॉलोनी विकसित हो गई हैं। यह सिलसिला थम नहीं रहा है। 

अन्य प्रस्ताव
शहर के नालों का विकास, चौराहों का सौंदर्यीकरण, अंडरपास, फ्लाई ओवर, फुटपाथ, कमर्शियल जोन का डेवलपमेंट, मल्टी लेवल पार्किंग जैसे काम शहर में होने थे, जो सही तरीके से नहीं हो पाए। कई प्रस्तावों पर काम शुरू किया गया, लेकिन काम पूरा नहीं हो पाया। 

अफसरों की शह पर हुआ खेल
दरअसल विभागों की मिलीभगत और अधिकारियों की शह पर मेरठ महायोजना अपने मूर्त रूप में नहीं आ सकी। उदाहरण, लावड़ रोड को महायोजना में यदि 60 मीटर चौड़ा किया गया तो यहां 45 मीटर पर कालोनियों के नक्शे पास क्यों किए गए। हवाई पट्टी को जोड़ने वाली रोड के बीच में अवैध कॉलोनी कैसे डेवलप होने दी गई। केवल एमडीए और आवास विकास ही नहीं बल्कि, सिंचाई, वन, पीडब्लूडी आदि विभागों ने भी शह दी और शहर का अनियोजित विकास होता गया।

वर्जन
कुछ प्रस्तावों पर अड़चनें आई हैं, जिसके चलते विकास रुक गया। बावजूद इसके महायोजना के काफी प्रस्तावों पर काम हुआ भी है। लगातार यह कोशिश जारी है कि शहर का सुनियोजित विकास हो। किसानों के मामले निपटेंगे तो और विकास होगा। - राजेश कुमार, एमडीए वीसी
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