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हाईकोर्ट के फैसले से फिर बढ़ी आरक्षण की बैचेनी

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पंचायत चुनाव : हाईकोर्ट के फैसले से फिर बढ़ी दावेदारों की बेचैनी
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मेरठ। हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक बार फिर जिले की ग्राम पंचायतों में आरक्षण को लेकर बैचेनी बढ़ गई है। एक तरफ जहां 15 मार्च को पंचायत चुनाव की अंतिम आरक्षण सूची पर मुहर लगनी थी। वही, दूसरी ओर हाईकोर्ट के 2015 के शासनादेश से आरक्षण सूची को लागू करने के फैसले से उन दावेदारों के चेहरे खिल उठे हैं, जो मायूस हो गए थे। अब एक बार फिर सभी की नजरें आरक्षण सूची पर लग गई हैं। हालांकि, अभी जिलास्तरीय अधिकारियों को शासन के शासनादेश का इंतजार है।
बताया जा रहा है कि होली से पहले 27 मार्च तक आरक्षण सूची को फाइनल करना होगा। इसके लिए अब एक बार फिर प्रशासनिक स्तर पर कड़ी मशक्कत करनी होगी। दोबारा से जिले की 479 ग्राम पंचायतों का आरक्षण नए सिरे से करना होगा। इसके लिए बीडीओ को प्रशिक्षण सहित अन्य सभी कार्य करने होंगे। इसमें जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य, ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान आदि का आरक्षण करना होगा।
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कुछ ऐसा हो जाएगा आरक्षण
वर्ष-2015 के शासनादेश के अनुसार ये तो तय है कि अगर आपका गांव पहले अनुसूचित जाति में रहा है तो इस बार उसका आरक्षण बदलना तय है। वहीं, अगर आपका गांव पिछड़ी जाति में था तो वह भी बदल जाएगा। हालांकि, वर्ष-1995 की नीति में ऐसा नहीं किया जा रहा था जो पहले पिछड़ी जाति में था उसे इस बार भी पिछड़ी जाति में कर दिया गया था। इसी कारण हाईकोर्ट में जनहित याचिका डाली गई।
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अभी शासनादेश का इंतजार करना होगा। जिस तरह से उस में निर्देश दिए होंगे उसी आधार पर जिला स्तर पर कार्य किया जाएगा - आलोक सिन्हा, जिला पंचायती राज अधिकारी
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