जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सत्ताधारी दल में रस्साकसी तेज होती जा रही है। एक तरफ जहां मंत्री खेमा अभी शांत तरीके से अपनी तैयारियों में लगा है। वहीं, कहा जा रहा है कि मंत्री विरोधी गुट एकजुट होने लगा है। अतुल प्रधान के साथ जहां डॉ. सरोजिनी तो एक तरह से खुलकर आ ही गई हैं।
वहीं, कहा जा रहा है कि पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह भी साथ खड़े हो गए हैं। इसके अलावा कुछ दर्जा प्राप्त मंत्री के साथ होने की बात भी अतुल खेमे से आ रही है। वहीं, दूसरी ओर मंत्री गुट अपने स्तर से गुणा-भाग में लगा हुआ है।
सपा में मंत्री शाहिद मंजूर के बेटे नवाजिश के अलावा अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान जिला पंचायत अध्यक्ष पद के दावेदार हैं। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव के बाद दोनों गुटों ने अपने-अपने तरीके से तैयारियां आरंभ कर दी हैं। मंगलवार को जब अतुल प्रधान की पत्नी सीमा के साथ प्रमाणपत्र लेने के लिए एमएलसी डॉ. सरोजिनी अग्रवाल पहुंचीं तो पार्टी में चल रही लामबंदी का अंदाजा हो गया।
कहा जा रहा है कि वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह और पार्टी के जिले के दो अन्य विधायकों के साथ कई दर्जा प्राप्त मंत्री भी मंत्री शाहिद मंजूर के विरोध में एकजुट हो गए हैं। यही खेमा जल्द लखनऊ जाकर संभव है कि पार्टी के आला पदाधिकारियों और मुख्यमंत्री तक अपने समर्थन में बात पहुंचाए। यह पूरी मुहिम मंत्री शाहिद मंजूर के बेटे नवाजिश मंजूर को अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर करने के लिए चल रही है।
वहीं मंत्री खेमा अभी शांत तरीके से इस संबंध में रणनीति बना रहा है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के आरक्षण में अनारक्षित होते ही यह बात कही गई थी कि मंत्री के बेटे का दावा मजबूत है। अब चुनाव होने के बाद मंत्री समर्थक इस बात को गिना रहे हैं कि उनके वार्ड में सभी विपक्षी दल एकजुट हो जाने के बाद भी नवाजिश ने जीत दर्ज की। इसके अलावा दर्जा प्राप्त मंत्रियों के विरोध में एकजुट होने को भी ज्यादा तवज्जो देने के मूड में मंत्री खेमा नहीं है।
तैयारी की जा रही है कि जिला पंचायत चुनावों में सभी दिग्गजों के क्षेत्र में पार्टी के समर्थित उम्मीदवारों की हार-जीत का लेखा-जोखा देकर खेमेबंदी करने वाले नेताओं के बारे में बताया जाएगा। साथ ही एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि दर्जा प्राप्त मंत्रियों में से अधिकांश शहरी क्षेत्रों से हैं, ऐसे में जिला पंचायत चुनाव में उनका हस्तक्षेप ठीक नहीं है।
यह बात और है कि पार्टी नेतृत्व के फैसले को देखते हुए अभी कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
मंत्री शाहिद मंजूर का कहना है कि अध्यक्ष पद का चुनाव होने में अभी समय है और चुनाव लड़ाने का फैसला पार्टी को करना है। जिसे पार्टी तय करेगी, उसे चुनाव लड़ाया जाएगा। वहीं अतुल प्रधान भी पार्टी आलाकमान पर ही प्रत्याशी के चुनाव का फैसला करने की बात कह रहे हैं।
सपा करेगी चुनाव नतीजों की समीक्षा
सपा कार्यालय पर हर माह होने वाली मासिक बैठक आज बृहस्पतिवार को होगी। बैठक में जिला पंचायत चुनाव के नतीजों को लेकर समीक्षा होगी। माना यह भी जा रहा है कि चुनावों में गुटबाजी के कारण बैठक हंगामेदार भी हो सकती है। सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह ने बताया कि पहले यह बैठक शनिवार को होनी थी लेकिन त्योहार के कारण पहले ही की जा रही है। कहा कि अभी जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के नाम संबंधी कोई सूची पार्टी को नहीं भेजी गई है। पार्टी आलाकमान निर्देशित करेगा तो इस संबंध में कार्य किया जाएगा।