पुराने बड़े नोट बंद होने का सबसे बड़ा असर बाजार पर पड़ा है। पिछले पांच दिनों में शहर का करीब पांच सौ करोड़ का कारोबार ठप हो चुका है। यदि ऐसे ही हालात रहे तो आने वाले दिनों में व्यापारियोें के सब्र का पैमाना छलक सकता है। हालात यह हो गए हैं कि इस समय सिर्फ रोजाना की बेहद जरूरी चीजों पर ही लोग बहुत संभलकर खर्च कर रहे हैं।
ये थी बाजार की पहली स्थिति
शहर में सराफा, कपड़े, किराना, जूता, गिफ्ट, रेडीमेड गारमेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स/इलेक्ट्रिकल्स आदि तमाम कारोबार करीब 100 करोड़ रोजाना का हो जाता था। देर रात तक शहर के रेस्टोरेंट गुलजार रहते थे। शनिवार रात और रविवार को अवकाश के दिन तो शॉपिंग मॉल, सिनेमाहाल और रेस्टोरेंट में ज्यादा भीड़ रहती थी। लोग शॉपिंग के लिए अवकाश के दिन ज्यादा निकलते थे। एक मोटे अनुमान के तौर पर औसतन रोजाना मेरठ में सौ करोड़ का थोक और रिटेल का कारोबार होता है।
अब ये है स्थिति
आठ नवंबर की रात प्रधानमंत्री ने पुराने पांच सौ और एक हजार के नोट का चलन बाजार में बंद कर दिया। अगले ही दिन से बाजार पूरी तरह सूना हो गया। नौ नवंबर को तो कुछ कारोबार हुआ भी। लेकिन दस नवंबर से अब तक बाजार पूरी तरह सूना पड़ा है। व्यापारियों की मानें तो पिछले चार दिन से बाजार में ग्राहक नहीं है। यदि कोई आ भी रहा है तो मजबूरी में अपनी दिनचर्या का जरूरी सामान लेने आ रहा है। खुले पैसे की तंगी में बाजार के हालात ये हो गये हैं कि चाट पकौड़ी, फास्ट फूड, फल आदि के ठेले लगाने वाले तक का काम ठप हो गया है।
इन पर नहीं कोई असर
पैसों की तंगी के बीच यदि कोई व्यापार प्रभावित नहीं हुआ तो वह पानी बीड़ी सिगरेट वालों का है। फूलबाग कॉलोनी के चौराहे पर पान की दुकान चलाने वाले मनोज शर्मा ने बताया कि उनकी दुकानदारी पर बहुत ही आंशिक प्रभाव पड़ा है। इस समय शौकिया पान खाने वाले गायब हैं, लेकिन जिन्हें पान खाने और सिगरेट पीने की लत है, वह ग्राहक लगातार आ रहे हैं। इसलिए उनकी दुकानदारी पर कोई असर नजर नहीं आ रहा है।
पेट्रोल की सेल बढ़ी दोगुनी
पांच सौ और एक हजार के नोट यदि प्राइवेट सेक्टर में कहीं चल रहे हैं तो वह पेट्रोल पंप है। जनपद में 110 पेट्रोल पंप है, जिन पर डीजल और पेट्रोल मिलता है। इन पेट्रोल पंपों पर प्रतिदिन औसतन 2.20 लाख लीटर पेट्रोल और 4 लाख लीटर डीजल की खपत होती है। लेकिन जब से बड़े नोट बंद हुए तो इनकी बिक्री दोगुना तक बढ़ गयी है। जो लोग अब तक गाड़ियों में 500 या हजार का पेट्रोल/डीजल भरवाकर चलते थे। वह अब टैंक फुल करा रहे हैं। दोपहिया वाहन चालक भी इसी कोशिश में है कि किसी तरह टंकी फुल हो जाए।
हो सकती है प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री का जल्दबाजी में लिया गया निर्णय आम जनता के साथ व्यापारियों पर भी भारी पड़ रहा है। यदि जल्दी ही इस स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो निश्चित ही व्यापार और व्यापारी जब प्रभावित होगा तो कोई प्रतिक्रिया हो सकती है।- नवीन गुप्ता, अध्यक्ष संयुक्त व्यापार संघ
आम आदमी कहां जाए
जो शादी वाले शादी है, उन्हें ऑर्डर देने हैं। लेकिन उनके पास पैसा नहीं है। बैंक से पूरी तरह पैसों की निकासी हो नहीं पा रही है। बड़े लोग तो आरटीजीएस आदि से ट्रांजक्शन करा रहे हैं। लेकिन गांव और शहर का आम आदमी नहीं आ रहा है। जिससे व्यापार पूरी तरह ठप है।- दिनेश रस्तोगी, अध्यक्ष सराफ व्यापार संघ
बिना होमवर्क निर्णय गलत
प्रधानमंत्री का जल्दबाजी में पूरी तरह गलत निर्णय है। बगैर होमवर्क किये नोट बंद करना सही निर्णय नहीं रहा। इससे व्यापारी और आम आदमी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस समय बाजारों में कोई काम नहीं है।- संजय गोयल, अध्यक्ष पीएल शर्मा व्यापार संघ