निर्माण संस्था की लापरवाही के कारण लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में बनाई गई मॉर्डन आईसीयू का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। आईसीयू में वेंटिलेटर की व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाए रखने के लिए निर्माण संस्था को ऑक्सीजन की सेंट्रलाइज्ड सप्लाई देनी थी, लेकिन इस व्यवस्था के शुरू नहीं होने से वेंटिलेटर की सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है। विकट परिस्थितियों में चिकित्सक ऑक्सीजन सिलेंडर से ही एक-दो बेड पर ही वेंटिलेटर की सुविधा दे पा रहे हैं।
मेडिकल कालेज में 150 करोड़ रुपये की लागत से बनी इमरजेंसी एवं ट्रामा सेंटर के हालत संसाधन होने के बाद भी बदतर हैं। शासन की ओर से बजट जारी होने के बाद भी क्षमता के हिसाब से मरीजों को भर्ती नहीं किया जा सकता है। आईसीयू के 21 बेड पर शासन की ओर से वेंटिलेटर की सुविधा दी गई है। ट्रामा सेंटर में वेंटिलेटर चलाए जाने के लिए ऑक्सीजन की सेंट्रलाइज्ड सप्लाई का होना अनिवार्य है। ट्रामा केस में मरीज को वेंटिलेटर स्पोर्ट देने के दौरान मशीन को बड़ी मात्रा में लिक्विड ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इस जरूरत को केवल और केवल सेट्रलाइज्ड तकनीक से ही पूरा किया जा सकता है। उधर, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) का स्पष्ट निर्देश है कि मेडिकल कॉलेजों की इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर पर ऑक्सीजन की सप्लाई प्लांट से ही होनी चाहिए ताकि आपात स्थिति में सिलेंडर बदलने के दौरान होने वाले हादसों पर नियंत्रण पाया जा सके।
मरीजों की जान पर भारी पडे़ वादे
मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी एवं ट्रामा सेंटर बनाने का जिम्मा शासन की ओर से भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ मर्यादित (एनसीसीएफ) को दिया गया था। निर्माण संस्था ने प्रथम चरण का काम निपटने पर भुगतान भी पूरा ले लिया, लेकिन ऑक्सीजन की सेंट्रलाइज्ड व्यवस्था नहीं दी। विवाद बढ़ने पर संस्था ने इसे द्वितीय चरण में पूरा करने का वादा किया। इस बीच विभिन्न मामलों को लेकर शासन की ओर से संस्था पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में ऑक्सीजन की सेंट्रलाइज्ड सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। इससे मरीज परेशान हैं।
सिलेंडरों से चल रहा काम
आईसीयू में सभी बेड पर वेंटिलेटर की सुविधा देने के लिए ऑक्सीजन की सेंट्रलाइज्ड सप्लाई का होना अनिवार्य है। क्याेंकि इतनी बड़ी संख्या में वेंटिलेटर चलने पर ऑक्सीजन की सप्लाई का लोड केवल सेंट्रलाइज्ड तकनीक से ही संभाला जा सकता है। गंभीर मामलों में चिकित्सक सिलेंडर चलाकर ही एक-दो बेड पर मरीजों को वेंटिलेटर की सुविधा दे पा रहे हैं।
जल्द लगायेंगे ऑक्सीजन टैंक
अभी तक सिलेंडर से ही सप्लाई की जा रही है। यह काफी महंगी है लेकिन हम लोग विचार कर रहे हैं कि जल्द ही ऑक्सीजन टैंक स्थापित किया जाए। इस पर काम चल रहा है। टैंक लगाने के बाद पुरानी बिल्डिंग और इमरजेंसी को पाइप लाइन के जरिये ऑक्सीजन सप्लाई होगी।
- डॉ. केके गुप्ता, प्राचार्य एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ।