मेडिकल सुविधाएं नहीं मिलने से व्यापारियों में आक्रोश
मेरठ। मेडिकल प्रबंधन की मनमानी और मेडिकल सुविधाएं नहीं मिलने से व्यापारियों में आक्रोश है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का नया मामला शुक्रवार को सामने आया। विभाग ने केसरगंज मंडी में होम क्वारंटीन परिवार को जिला अस्पताल जाकर सैंपल देने के लिए बाध्य किया। क्षेत्रीय लोगों और व्यापारियों ने इसका विरोध किया। इसी परिवार के सदस्य को कोरोना पुष्टि के बाद दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
केसरगंज मंडी निवासी सरकारी ठेकेदार को चार दिन पूर्व कोरोना की पुष्टि होने पर दिल्ली स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। घर में उनके दो छोटे बच्चे (उम्र 7 व 11 साल) अपनी मां के साथ क्वारंटीन है। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि मेडिकल प्रबंधन की ओर से परिवार को कोई सुविधा नहीं दी गई। अब महिला को टेस्ट कराने के लिए जिला अस्पताल बुलाया जा रहा है। केसरंगज मंडी व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश गुप्ता ने कहा कि क्वारंटीन व्यक्ति को घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती है। मेडिकल प्रबंधन किस आधार पर महिला और उसके बच्चों को जिला अस्पताल बुला रहा है। उनके लिए एंबुलेंस भेजी जानी चाहिए या घर से सैंपल लिया जाए।
मौत के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
योगेश गुप्ता ने आरोप लगाया कि मेडिकल प्रबंधन की अव्यवस्थाओं के कारण ही केसरगंज मंडी के व्यापारी विजय गर्ग की मौत हो गई। टेस्ट के बाद उन्हें भी मेडिकल से पैदल घर तक आना पड़ा था। व्यापारी और उनके परिजनों के साथ उसी तरह की लापरवाही दोबारा की जा रही है।
आज तक नहीं आई 44 लोगों की रिपोर्ट
विजय गर्ग के पॉजिटिव मिलने के बाद मंडी और मछेरान से करीब 44 लोगों के सैंपल लिए गए थे। उनकी रिपोर्ट आज तक नहीं आई। इस बीच सरकारी ठेकेदार कोरोना पॉजिटिव हो गया। ठेकेदार ने रिपोर्ट की जानकारी न मिलने पर निजी लैब में टेस्ट कराया था।
जिला अस्पताल नहीं जाएंगे बच्चे
मेरठ मर्चेंट एसोसिएशन केसरगंज मंडी अध्यक्ष नवीन बंसल ने कहा कि बच्चे और महिला को टेस्ट के नाम जिला अस्पताल ले जाना अनुचित हैं। मेडिकल टीम को घर आकर ही सैंपल लेना चाहिए। पूर्व में इन्हीं अव्यवस्थाओं के कारण मंडी के एक व्यापारी की मौत हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में भाजपा जिला और प्रदेश स्तर के नेताओं के साथ सीएमओ को भी अवगत कराया गया है।