सहारनपुर। गन्ने की फसल में रेडरॉट और विल्ट आदि गंभीर रोगों का प्रकोप दिख रहा है। गन्ना विभाग द्वारा कराए गए एक सर्वें में सामने आया है कि जनपद में 399.11 हेक्टेयर गन्ना फसल रेडरॉट, रूट बोरर और विल्ट रोग की चपेट में है।
रेडरॉट को गन्ने का कैंसर कहा जाता है। गन्ना प्रजाति कोशा-0238 में इसका अधिक प्रकोप दिखाई दे रहा है। इस रोग से प्रभावित गन्ने की ऊपर से तीसरी चौथी पत्ती सूखने लगती है और सीधी खडी रहती है। यह रोग कोलेटोट्राइकम फालकेटम नामक फफूंद से होता है। प्रभावित गन्ने को बीच से फाड़ने पर अंदर से लाल रंग निकलता है। इसमें से सिरके जैसी गंध आती है और गन्ना धीरे धीरे सूख जाता है। विल्ट रोग से प्रभावित गन्ने की पत्तियों में पीलापन आ जाता है। सामान्य से कम वर्षा, आर्द्रता कम होना, मृदा में नमी का अभाव और उच्च तापमान में यह रोग बढ़ता है। जिले में 40.04 हेक्टेयर रेडरॉट और 359.08 हेक्टेयर गन्ना फसल विल्ट एवं रूट बोरर से प्रभावित है।
ऐसे करें नियंत्रण
जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि रेडरॉट का प्रकोप 20 फीसदी से कम होने पर प्रभावित पौधों को जड़ से उखाड़कर जला देना चाहिए। उस स्थान पर 10 ग्राम ब्लीचिंग पाउड़र डालकर और हैक्सास्टाप के 0.1 प्रतिशत के घोल की ट्रिचिंग कर ढक देना चाहिए। उस खेत में एक वर्ष तक गन्ने की खेती नहीं करें। फसल को संक्रमण से बचाने के लिए एमीस्टार, एजीडेजो या अजाका की 160 मिलीलीटर मात्रा को 400 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव बुवाई के 40 से 45 एवं 60 से 65 दिन बाद दो बार करें। विल्ट रोग पर नियंत्रण के लिए फसल पर सिस्टमिक फंजीसाइड, थायोफिनेट मिथाइल 70 डब्लूपी की 1.3 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर दो बार छिड़काव करना मुफीद रहता है। इसके बाद गन्ने की जड़ों के पास चार किलो ट्राइकाडर्मा को 40 से 80 किलो गोबर की खाद में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से डालना चाहिए।