रात में जागना और दिन में सोना, चिंता में घिरे अभिभावक, तर्क करने की शक्ति पर भी लग रहा ग्रहण
कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को मोबाइल फोन की लत लग गई। मोबाइल पर पढ़ाई से दिमाग की तर्क शक्ति घट रही है। मोबाइल फोन में अनेक एप से जीवन में भटकाव अभिभावकों की चिंता बढ़ा रहा है। विद्यार्थियों और चिकित्सकों का मानना है मामूली उलझन में मोबाइल की हेल्प से बच्चों में सोचने की शक्ति कम हो रही है। क्लास में शिक्षकों को उलझनों के सवाल जवाब से व्यावहारिक ज्ञान मिलता था। अमर उजाला ने इस मुद्दे पर विद्यार्थियों से बातचीत की है।
शहर की मानसरोवर कॉलोनी निवासी इलिका देहरादून में बीकॉम द्वितीय वर्ष में पढ़ाई कर रही है। लॉकडाउन से घर से ऑनलाइन पढ़ाई के अलावा एग्जाम दिए हैं। कहती है आंखों में दिक्कतें बढ़ रही हैं। डीयू कॉलेज में बीएससी कंप्यूटर साइंस से बीएससी करने वाली शहर की छात्रा जाह्नवी का मंतव्य है कि मोबाइल फोन ने दिमाग पर डाका डाल दिया है। उस पर देखकर एग्जाम देने से व्यावहारिक ज्ञान कमजोर हो रहा है। क्लास में टीचर पढ़ाते हैं, तो वह मेमोरी में फिट बैठता है।
मेरठ में एक इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक करने वाली प्रेमपुरी निवासी रीतिका और पटेल नगर निवासी विदुषी डीयू से बीएससी करने वाली छात्राओं की राय भी यहीं है। कहती हैं ऑनलाइन पढ़ाई करना मजबूरी का कार्य है। शहर के आदर्श कॉलोनी निवासी अक्षांश त्यागी एसडी पब्लिक स्कूल से इंटर की तैयारी कर रहे हैं। घर से मोबाइल फोन पर आंखों के अलावा कई दिक्कतें आती हैं।शहर से बीफार्मा तृतीय वर्ष में चरथावल का आकाश परीक्षा की तैयारी घर से कर रहा है। मोबाइल फोन पर पढ़ाई के साथ नेटवर्क की दिक्कत आड़े आती है और कई बार उलझनों का समाधान नहीं होने से तनाव होने लगता है।
क्या कहते हैं चिकित्सक
ऑनलाइन पढ़ाई का बोझ आंखों पर प्रभाव डाल रहा है। विद्यार्थी मोबाइल पर पढ़ाई से भटक कर अनेक एप गेम आदि देखने लगते है। समय बर्बाद होता है। जिससे सोचने समझने की शक्ति नहीं रहती। कई बार नई पीढ़ी अवसाद में आने लगती है। डॉ. प्रमोद कुमार
अभिभावकों की राय:
अभिभावक अमित गर्ग, सारिका, पंकज आदि कहते हैं मोबाइल फोन से चिपकने का कारण पूछने पर बच्चे कोर्स की बात बताते हैं। कई बार कोर्स समझ नहीं आने से बच्चे चिंता में डूबे रहते है। कोविड में एंड्रायड फोन से बच्चों की जिंदगी में बदलाव उनके भविष्य के लिए चिंताजनक है।