अध्यादेश से जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों में आएगी कमी
बहसूमा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में धर्मांतरण के मामले में मंगलवार को नया अध्यादेश लागू कर दिया गया है। इस नियम के तहत यदि सिर्फ शादी के लिए लड़की का धर्म बदला गया है तो ऐसी शादी को अमान्य घोषित माना गया है। इस पर कानूनविद्, प्रबुद्ध लोगों व समाज के प्रतिष्ठित लोगों की राय ली गई। लोगों का कहना है कि धर्मांतारण अध्यादेश बेटियों की अस्मिता के लिए बेहतर है। इसे लेकर किसी भी प्रकार की राजनीति न की जाए।
अधिवक्ता नौशाद अहमद का कहना है कि इस अध्यादेश के बाद जबरन धर्म परिवर्तन के मामले में काफी हद तक कमी आएगी। पूर्व में हिंदु लड़कियों को बरगलाकर लाया जाता था। निकाह में दोनों पक्षों का मुस्लिम होना जरूरी होता है। जबरन धर्म बदलकर निकाह को अंजाम दे दिया जाता था। इस्लाम धर्म में जबरन धर्म परिवर्तन की जगह नहीं है।
मजलूम समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लियाकत मुस्लिम का कहना है कि पार्टी इस अध्यादेश का स्वागत करती है। बशर्ते इसमें हिंदु-मुस्लिम के नाम पर कोई भेदभाव व पक्षपात न हो। धर्म परिवर्तन करने वालों के माता-पिता को भी सूचित करना चाहिए। ताकि वे उच्चाधिकारियों को इसकी शिकायत दर्ज करा सकें। यह अध्यादेश केवल एक समाज के लिए नहीं, बल्कि तमाम मजहब की बेटियों की अस्मिता लिए बेहतर कदम है।