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Meerut News: शोर में दबे आदेश... धुआं-धुआं हुए दावे

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मोदीपुरम। पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध के आदेश बेअसर नजर आए। शहर और देहात में चोरी-छिपे पटाखों की जमकर बिक्री हुई। आतिशबाजी के चलते ध्वनि और वायु प्रदूषण मानक से ऊपर दर्ज किया गया। सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण बेगमपुल पर दर्ज किया, जो 82.9 डेसीबल था। यहीं का एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) भी सबसे अधिक 450 दर्ज किया गया।
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पटाखों के शोर में सभी मानक व सुप्रीम कोर्ट के आदेश धुएं में उड़ गए। देर रात तक शहर से लेकर देहात में जमकर आतिशबाजी हुई। हालांकि, इस बार पिछले सालों के मुकाबले कई स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण कम दर्ज किया गया और कुछ स्थानों पर प्रदूषण का स्तर बढ़ा। दीपावली से पहले दावा किया गया था कि शहर से लेकर देहात में पटाखों की बिक्री नहीं होने दी जाएगी, लेकिन आदेशों के बाद भी जमकर पटाखों की बिक्री हुई। वहीं पिछले साल के मुकाबले ध्वनि और वायु प्रदूषण कुछ कम रिकॉर्ड किया गया। 2023 में बेगमपुल पर ध्वनि प्रदूषण 85.5 डेसीबल और वायु प्रदूषण 470 था।

(संवाद)


ध्वनि प्रदूषण का हाल
स्थान दीपावली से पहले दीपावली के दिन
कैंट हॉस्पिटल 58.4 67.8
कलक्ट्रेट 61.3 66.4
रेलवे रोड 67.5 75.3
बेगमब्रिज 73.4 82.9
थापरनगर 65.7 78.4
शास्त्रीनगर 68.9 79.6
कैंट बोर्ड 60.8 71.3
पल्लवपुरम 64.6 74.8
(आंकड़े प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से लिए गए हैं। ध्वनि को डेसिबल में मापा गया है।)




दीपावली पर बढ़ा स्मॉग
दिल्ली एनसीआर में दीपावली पर एक्यूआई का स्तर 430 के स्तर पर पहुंच गया। बृहस्पतिवार को हर घंटे एक्यूआई स्तर में उछाल दर्ज किया गया। रात में एक्यूआई खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। शुक्रवार को भी एक्यूआई का स्तर 300 के नजदीक दर्ज किया गया। दीपावली पर्व से पहले एक्यूआई का स्तर 150 से 250 तक था। बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 153 दर्ज किया गया था। दीपावली पर सुबह के समय एक्यूआई का स्तर 190 दर्ज किया गया, जो रात में बढ़कर 430 के स्तर पर पहुंच गया। शहर से लेकर देहात में आतिशबाजी हुई, जिस कारण सीजन में पहली बार एक्यूआई का स्तर अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा। शहर में जयभीमनगर में 243, गंगानगर में 338, पल्लवपुरम में 302, बेगमपुल 335, दिल्ली रोड 340, शास्त्रीनगर 355 दर्ज किया गया। वहीं, दिन का अधिकतम तापमान 32.1 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
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वर्जन
जिले में प्रदूषण बढ़ने का केवल पटाखे ही नहीं, बल्कि पुराने वाहन व निर्माण कार्य भी जिम्मेदार हैं। बेगमपुल पर सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण दर्ज किया गया। प्रदूषण विभाग ने आठ स्थानों से आंकड़े जुटाए थे। हालांकि, इस बार पिछले साल के मुकाबले कई स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण कम रहा। दीपावली पर देर रात तक व अगले दिन भी पटाखे छोड़े गए। - भुवन प्रकाश यादव, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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