संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में स्क्रूटनी और चुनौती मूल्यांकन के दौरान अंकों में लगातार हो रही वृद्धि और मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनौती मूल्यांकन के परिणाम जारी करने के प्रारूप में बदलाव किया है। छात्र नेताओं ने इसे पारदर्शिता समाप्त करने और मूल्यांकन संबंधी खामियों पर पर्दा डालने का प्रयास बताते हुए विरोध जताया है।
छात्र नेता अंकित अधाना सहित अन्य ने आरोप लगाया कि विवि में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और अंकों की फीडिंग में लगातार गंभीर त्रुटियां सामने आ रही हैं। इन कमियों को दूर करने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनौती मूल्यांकन के परिणाम का प्रारूप ही बदल दिया है। पहले जारी होने वाले परिणाम में छात्र के मूल अंक, चुनौती मूल्यांकन करने वाले दोनों परीक्षकों द्वारा दिए गए अंक और अंतिम प्राप्तांक स्पष्ट रूप से दर्शाए जाते थे। इससे यह पता चल जाता था कि प्रारंभिक मूल्यांकन में कहां और कितनी त्रुटि हुई थी।
उन्होंने बताया कि अब जारी किए जा रहे नए प्रारूप में केवल अंतिम प्राप्तांक ही प्रदर्शित किए जा रहे हैं। ऐसे में छात्रों को यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि दोनों परीक्षकों ने कितने अंक दिए और उनके अंकों में कितना अंतर रहा। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनौती मूल्यांकन के लिए छात्र को प्रति प्रश्नपत्र 2800 रुपये शुल्क देना पड़ता है जबकि उत्तर पुस्तिका की प्रति प्राप्त करने के लिए अलग से 300 रुपये जमा कराने होते हैं। इतनी राशि खर्च करने के बाद छात्रों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनकी कॉपी का मूल्यांकन किस प्रकार किया गया और परीक्षकों ने उन्हें कितने अंक प्रदान किए। उन्होंने विवि प्रशासन से मांग की है कि चुनौती मूल्यांकन के परिणामों को पुराने पारदर्शी प्रारूप में जारी किया जाए।