संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान महोत्सव के 28वें दिन 130 परिवारों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ विधान में सहभागिता की।
मुख्य मंदिर में श्रद्धालुओं ने भगवान का सामूहिक अभिषेक किया। सभी भक्त विधान स्थल पहुंचे और जिनेंद्र भगवान का अभिषेक एवं अन्य मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराई। श्रीजी को लेकर सौधर्म इंद्र बनकर शांतिधारा करने का सौभाग्य कुमकुमेंद्र जैन, अक्षत जैन, प्रतिभा जैन, रम्यक जैन एवं पारुल जैन को प्राप्त हुआ। पंडित आशीष जैन शास्त्री एवं पंडित दिलीप शास्त्री ने वैदिक एवं जैन मंत्रों के उच्चारण के बीच शांतिधारा संपन्न कराई।
मुनि श्री भाव भूषण महाराज ने कहा कि सत्य ही जीवन का सबसे बड़ा धर्म है। झूठ मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है, जबकि सत्य का मार्ग उसे सुख, शांति और आत्मिक उन्नति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति झूठ बोलने के कारण नरक तक पहुंच सकता है, जबकि सत्य बोलने से स्वर्ग का मार्ग प्रशस्त होता है। इसलिए प्रत्येक प्राणी को अपने जीवन में सत्य का पालन करना चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि सत्य केवल शब्दों का विषय नहीं, बल्कि अनुभूति का विषय है। सत्य आंखों से दिखाई नहीं देता, लेकिन वह संपूर्ण विश्व में व्याप्त है। उन्होंने कहा कि सत्य को प्राप्त करने का पहला कदम झूठ का त्याग है, लेकिन ऐसा सत्य भी नहीं बोलना चाहिए जिससे किसी दूसरे को पीड़ा पहुंचे।
उन्होंने राजा हरिश्चंद्र का उदाहरण देते हुए कहा कि सत्यवादी व्यक्ति की हमेशा परीक्षा होती है, लेकिन वह हर परिस्थिति में खरा उतरता है। सत्य को कुछ समय के लिए दबाया जा सकता है, परंतु उसे पराजित नहीं किया जा सकता। श्रद्धालुओं ने भगवान मल्लिनाथ की भक्ति में भजन प्रस्तुत किए। त्रिमूर्ति जिनालय में संगीतमय आरती हुई। सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस मौके पर अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, मंत्री राजीव जैन, विधान संयोजक विजय कुमार जैन, विनय कुमार जैन, सुशील जैन, अतुल जैन, प्रबंधक मुकेश जैन सहित अनेक पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।
प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद