ऑनलाइन महाठगी में अनुभव मित्तल के साथ ही ऐसे लोगों से वसूली हो सकती है, जिन्होंने शुरूआत में मोटा पैसा लगाकर उससे कई गुना अधिक कमाई की। तमाम सरकारी एजेंसियों के सूत्रों की मानें तो सभी लोगों का पैसा लौटाने के लिए उन तमाम लोगों से वसूली होगी जिन्होंने लगाई गई पूंजी के बदले पांच से 10 गुना तक कमाई की। ऐसे लोगों की इनकम टैक्स से जुड़ी फाइलों को भी खंगाला जा रहा है।
अनुभव मित्तल की कंपनी से सोशल ट्रेड डॉट बिज से जुड़े खातों में करीब 500 करोड़ रुपये की रकम अभी तक जांच एजेंसियों को मिली है। जबकि घोटाला 37 अरब से ज्यादा का है। ऐसे में जाहिर तौर पर बड़ी संख्या में लोगों का पैसा फंसा है, क्योंकि कंपनी के पास आय का कई और जरिया नहीं था बल्कि वो लोगों का पैसा घूमाकर एक-दूसरे को जारी कर रही थी। ऐसे में साफ है कि बड़ी संख्या में लोगों का पैसा फंसा है।
पांच लाख लोग घाटे में
इस महाघोटाले की आयकर विभाग, सेंट्रल एक्साइज, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से लेकर यूपी एसटीएफ की टीमें जांच में लगी हैं। अभी तक 5 हजार से अधिक शिकायतें मिल चुकी हैं। जांच एजेंसियां अंदाजा लगा रही हैं कि करीब 7 लाख लोगों से पैसा लगवाने वाली कंपनी में पांच लाख से अधिक लोग घाटे में होंगे। जिनकी मूल रकम की वापसी अभी तक नहीं हुई होगी। हालांकि वास्तविकता में कितनी रकम फंसी है, इसका दर्ज की जा रही शिकायतों के आधार पर रकम जोड़ने के बाद ही सही अंदाजा लगाया जा सकता है।
कोर्ट के फैसले का इंतजार
सूत्रों का कहना है कि अनुभव मित्तल पक्ष के लोग उम्मीद जता रहे हैं कि अनुभव को जल्द ही जमानत मिल जाएगी। जबकि जांच एजेंसियां अनुभव को रिमांड पर लेने की तैयारी में हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि अनुभव को जमानत नहीं मिलती है तो शिकायतों की संख्या और बढ़ेगी।
चिह्नित हो रहे मोटे कमाई वाले
यूपीएसटीएफ व अन्य जांच एजेंसियां सोशल ट्रेड डॉट बिज में मोटा पैसा लगाने वाले लोगों को शॉर्ट लिस्ट कर रही हैं। ऐसे लोगों को इनकम टैक्स जमा करने से लेकर लगाए गए पैसे का जरिया तक बताना होगा। वहीं, ऐसे लोगों से विभाग नोटिस जारी कर वसूली भी कर सकते हैं। जिसको लेकर पहले से ही सारी एजेंसियां काम कर रही हैं। सेंट्रल एक्साइज कंपनी के पंजीकरण से लेकर अब तक किए गए कारोबार और उस पर जमा किए गए सर्विस टैक्स का ब्यौरा खंगाल रही है, तो बाकी एजेंसियां ग्राहकों से लेकर टैक्स चोरी के पार्ट पर काम कर रही हैं। कुल मिलाकर एजेंसियों की तरफ से संकेत साफ है कि कंपनी में मोटा पैसा लगाने वालों को भी अब जवाब देना होगा।