एकमुश्त समाधान योजना रफ्तार नहीं पकड़ पाई
मेरठ। एलएमवी-2 वाणिज्यिक, एलएमवी-4बी निजी संस्थान और एलएमवी-6 औद्योगिक श्रेणी के बकाएदार बिजली उपभोक्ताओं के लिए शुरू कोविड-19 एकमुश्त समाधान योजना कछुआ गति से चल रही है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) में अब तक करीब 12 हजार उपभोक्ताओं ने ही योजना में पंजीकरण कराने के बाद सात करोड़ रुपये की सरचार्ज छूट प्राप्त की है। मेरठ जिले के 1700 उपभोक्ताओं ने पंजीकरण कराकर करीब 75 लाख रुपये की छूट प्राप्त कर ली है।
कोरोना के चलते कारोबार नहीं चलने पर योजना में शामिल उपभोक्ताओं का बकाया बिल में जुड़ा सरचार्ज शत-प्रतिशत माफ किया जाना है। इसके लिए 15 दिसंबर, 20 से शुरू पंजीकरण 31 जनवरी तक चलने हैं। पीवीवीएनएल में इन तीनों श्रेणी के बकायेदार उपभोक्ताओं की संख्या करीब ढाई लाख है और इन पर विभाग का करीब 564 करोड़ रुपये बकाया है। अगर ये सभी उपभोक्ता बकाया बिल जमा कर दे तो इन्हें 174 करोड़ रुपये सरचार्ज माफी का फायदा मिलेगा।
पंजीकरण के लिए 31 जनवरी तक का वक्त
योजना में शामिल बकाएदार 31 जनवरी तक पंजीकरण करा सकते हैं। इसके लिए उपभोक्ताओं को नवंबर, 20 तक के बकाया बिल में प्रदर्शित मूल राशि का 30 फीसदी एवं 30 नवंबर बाद वाला करंट बिल एक साथ जमा करना होगा। पंजीकरण के बाद 28 फरवरी तक संशोधित बिल जमा कराने पर उसे सरचार्ज की शत-प्रतिशत माफी दी जाएगी। उपभोक्ता यूपीपीसीएल की वेबसाइट www.upenergy.in पर स्वयं पंजीकरण कर सकते हैं।
तेजी लाई जाएगी
कोविड-19 एकमुश्त समाधान योजना में अभी कम पंजीकरण हुए हैं। इसमें तेजी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी, पीवीवीएनएल
कमीशन के फेर में फंसी विद्युत बिल जमा योजना
मेरठ। राशन की दुकानों पर बिजली के बिल जमा करने की व्यवस्था कमीशन के फेर में फंस गई है। एक नवंबर से शुरू इस योजना में अभी तक शहरी क्षेत्र की 333 दुकानों में से 167 पर ही 1,22,926 रुपये के बिल जमा कराए जा सके हैं। देहात क्षेत्र में 560 दुकानों में से करीब 90 पर ही बिल जमा किए गए। यहां राजस्व का आंकड़ा एक लाख रुपये भी नहीं छू पाया है।
योजना के प्रति कोटेदारों का रुझान नहीं होने की बड़ी वजह एडवांस रिचार्ज प्रक्रिया है। योजना के अनुसार कोटेदार को पहले अपने सामान्य बैंक खाते में ई-बैंकिंग शुरू करानी होती है। ई-पीओएस मशीन सर्विस प्रोवाइडर कंपनी यह पैसा पीवीवीएनएल को ट्रांसफर करती है। कोटेदार को एक हजार रुपये के बिल पर 25 रुपये कमीशन निर्धारित है। कोटेदारों ने इसे बहुत कम बताते हुए सेवाएं देना बंद कर दिया है। इस बारे में जिला पूर्ति अधिकारी नीरज सिंह कहते हैं कि व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जल्द कुछ बदलाव होने जा रहे हैं।
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