कांवड़ यात्रा में मिट जाती है जाति-भेद की दीवारें, हर शिवभक्त की एक ही पहचान भोला
शरद गुप्ता
दौराला (मेरठ)। दिल्ली-देहरादून हाईवे पर इन दिनों सिर्फ कांवड़ियों की भीड़ नहीं है, बल्कि यहां देश के अलग-अलग रंग भी दिखाई दे रहे हैं। कोई दिल्ली से चला है, कोई अलीगढ़ तो कोई राजस्थान से। कोई परिवार के साथ भोले की भक्ति के लिए निकला है तो कोई दोस्तों की टोली के साथ। किसी के कंधे पर सजी-धजी कांवड़ है तो किसी के कदमों में कई किलोमीटर का सफर। उम्र, शहर, पेशा और परिस्थितियां अलग हैं लेकिन सभी की मंजिल एक है शिव धाम।
कांवड़ यात्रा में जाति, वर्ग और भेदभाव सब पीछे छूट गए हैं। कांवड़ उठाते ही एक-दूसरे की पहचान ‘भोलेभक्त’ की हो जा रही है। रास्ते में कोई नाम नहीं पूछ रहा। थके कांवड़िये को देखकर दूसरा भोला पानी या आराम की सलाह दे रहा है। यही अपनापन इस यात्रा को अलग रंग देता है। इस यात्रा में कांवड़ के भी अलग-अलग रंग दिखाई दे रहे हैं। कोई लग्जरी कार में भोलेनाथ की भव्य मूर्ति लेकर चल रहा है तो कोई आकर्षक झांकी वाली कांवड़ लेकर निकला है। कहीं बेटियों को पालकी में बैठाकर कांवड़ यात्रा कराई जा रही है तो कहीं कलश वाली कांवड़ श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है। किसी कांवड़ में रोशनी और सजावट आकर्षण का केंद्र है तो कोई सादगी के साथ पैदल ही अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा है। (संवाद)
दिल्ली के राजौरी गार्डन निवासी आकाश एमसीडी में कार्यरत हैं। बताया कि व्यस्त समय में से भी वह भोले की भक्ति के लिए समय निकाल लेते हैं। उनके साथ साथी विजय भी कांवड़ ला रहे हैं।
दिल्ली के नांगलोई निवासी रोशन का कहना है कि वह मैकेनिक हैं। आय का स्रोत सीमित है लेकिन शिव की भक्ति की कोई सीमा नहीं है। बताया कि यात्रा में एकजुटता साफ दिखाई देती है। कांवड़ यात्रा में शामिल होकर सनातन होने पर गर्व महसूस होता है।
गढ़ रोड सिसौली निवासी मोहित का कहना है कि देश की सबसे बड़ी पैदल यात्रा है और यह यात्रा एकजुटता, प्रेमभाव का संदेश देती है। मेरठ पहुंचने पर शिवभक्तों को जिस तरह का प्यार और अपनापन मिलता है, उससे सफर की थकान भी कम हो जाती है।
इनसेट
सफर में नहीं किसी बात की चिंता
कांवड़ियों के मुताबिक दादरी से परतापुर तक जगह-जगह सेवा शिविर लगे हैं। कहीं भोजन, कहीं पेयजल और कहीं चिकित्सा की सुविधा मिल रही है। रात में भी शिवभक्तों को ठहरने और आराम की चिंता नहीं रहती। हाईवे के आसपास गांवों के लोग भी कांवड़ियों को पेयजल और शीतल पेय बांटते नजर आते हैं। सेवा में किसी की जाति या पहचान नहीं पूछी जाती। उमस और लंबी दूरी के बावजूद शिवभक्तों के कदम लगातार आगे बढ़ रहे हैं। कहीं डीजे की धुन पर युवा झूम रहे हैं तो कहीं बुजुर्ग शांत भाव से अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं।
दौराला - दिल्ली राजौरी गार्डन निवासी विजय। कांवड़ वाली खबर के साथ। स्रोत: संवाद
दौराला - दिल्ली राजौरी गार्डन निवासी विजय। कांवड़ वाली खबर के साथ। स्रोत: संवाद