वायु प्रदूषण को लेकर देश में त्राहिमाम मचा हुआ है। लोग बीमार हो रहे है और चारों तरफ पुराने प्रतिबंधित वाहनों को एनसीआर से बाहर खदेड़ने की कवायद का ढोंग हो रहा है। लेकिन सच्चाई ये है कि अकेले मेरठ में ही करीब एक लाख प्रतिबंधित वाहन धुआं उगलते दौड़ रहे हैं।
आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस का पूरा अमला होने के बाद भी प्रतिबंधित वाहनों को शहर से बाहर नहीं किया जा सका है। आदेश के करीब पांच साल बाद केवल दस हजार वाहनों ने ही एनओसी लेकर बाहर का रास्ता नापा है।
पिछले दिनों दिल्ली और एनसीआर में छाए पराली के धुएं ने देशभर के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। पराली के साथ ही प्रतिबंधित वाहनों के शहर से बाहर नहीं होने की बात भी सामने आई थी।
लोगों के स्वास्थ्य को बचाने और दिल्ली समेत एनसीआर की हवा को स्वच्छ रखने के लिए एनजीटी ने अप्रैल 2015 में यहां संचालित हो रहे 10 साल पुराने डीजल व 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को प्रतिबंधित करते हुए बाहर करने के निर्देश दिए थे, लेकिन आदेश को करीब पांच साल होने के बाद भी प्रतिबंधित वाहनों पर लगाम नहीं लग सकी है।
आरटीओ और पुलिस के संरक्षण में जर्जर और खटारा वाहन शहर में धुएं का जहर घोलते दौड़ रहे हैं। मेरठ की बात करे तो यहां संख्या घटने की बजाय बढ़ती जा रही है।