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सांसद सत्यपाल सिंह के बहाने, PM मोदी ने साधे तीन निशाने

Tue, 05 Sep 2017 09:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मदन बालियान, बागपत
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पीएम मोदी और डॉ. सत्यपाल सिंह
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद डॉ सत्यपाल सिंह को मानव संसाधन, जल संसाधन और नदी विकास राज्यमंत्री बनाकर एक तीर से तीन निशाने साधे हैं। एक गढ़ में ही रालोद की वापसी रोकने के लिए उन्हें ताकत दी गई, दूसरे सरकार में वेस्ट यूपी से जाट बिरादरी का प्रतिनिधित्व बरकरार रहा और तीसरा करीब 30 साल की उनकी पुलिस सेवा के अनुभव का लाभ उठाने की तैयारी। 
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केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ सत्यपाल सिंह दूसरे भाजपा सांसद है, जो रालोद के गढ़ बागपत से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। उन्होंने बड़े अंतर से चौधरी अजित सिंह को हराया था। बागपत में सियासत का इतिहास बताता है कि 1998 के लोकसभा चुनाव में चौधरी अजित सिंह को हराकर रालोद के किले में सेंध लगाई थी, लेकिन अगले साल ही 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में चौधरी अजित ने सिंह फिर से अपने गढ़ पर कब्जा कर लिया था। सांसद डॉ संजीव बालियान के इस्तीफे के बाद वेस्ट यूपी की जाट बेल्ट में भाजपा के प्रति असंतोष की भावना न पनपे, इस नजरिए से वेस्ट यूपी से मोदी मंत्रीमंडल में भाजपा का जाट चेहरा भी है। असल में बीजेपी का राष्ट्रीय नेतृत्व जानता है कि  डॉ सत्यपाल सिंह ने महाराष्ट्र कैडर की पुलिस सेवा में रहते हुए नाम कमाया। सीबीआई में सेवाएं दी और वह मुंबई के पुलिस कमिश्नर भी रहे। पीएम मोदी ने उनकी इसी छवि और कार्यशैली का प्रयोग करने के लिए मंत्रीमंडल में जगह दी। लेकिन उनके लिए चुनौतियां भी कम नहीं है। राज्यमंत्री बनने के बाद लोगों को उनसे उम्मीदें भी बढ़ गई है। 

मेरी मंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं : हुकुम सिंह
शामली। कैराना से भाजपा सांसद हुकुम सिंह का राजनीति में लंबा अनुभव है। सक्रिय राजनीति में हुकुम सिंह लंबे समय से भाजपा में हैं। पार्टी में उनका कद किसी भी स्तर से कमतर नहीं आंका जाता है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हुकम सिंह ने कहा कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल को संतुलित बनाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि मंत्री बनने की मेरी कोई इच्छा नहीं है। रविवार को अमर उजाला से फोन पर बातचीत में कैराना से भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल को संतुलित करने का प्रयास किया है। पीयूष गोयल ने ऊर्जा मंत्री रहते हुए अच्छा कार्य किया। वह युवा हैं और ऊर्जा के साथ कार्य करते हैं।
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जाट चेहरों में भाजपा का सिरमौर कौन

डॉ. सत्यपाल सिंह
मोदी मंत्रीमंडल के विस्तार के साथ ही वेस्ट यूपी की जाट सियासत में हलचल मची है। भाजपा की वेस्ट यूपी की जाट राजनीति के पन्ने पलटें तो केंद्र में जब भी भाजपा की सरकार बनी भाजपा एक न एक जाट चेहरे पर दांव खेलती रही है। इस बार सरकार बनने पर डाक्टर संजीव बालियान को भाजपा जाट चेहरे के तौर पर आगे किया। लेकिन अब अचानक उनसे इस्तीफा लेकर डाक्टर सत्यपाल सिंह को आगे किया है। अब सवाल है कि क्या डाक्टर संजीव बालियान को संगठन में समायोजित किया जाएगा या फिर 2019 के चुनाव में डाक्टर सत्यपाल सिंह को आगे किया जाएगा। कौन होगा भाजपा के जाट चेहरों में सिरमौर, यह सवाल भी उठ रहा है। भाजपा के जाट सांसदों की लंबी फेहरिस्त है। बागपत से शुरू करें तो रालोद मुखिया को हराकर सोमपाल शास्त्री लोकसभा पहुंचे। भाजपा ने उन्हें कृषि मंत्री बनाया, लेकिन वह खुद को जाट लीडरशिप में स्थापित नहीं कर पाए। यहीं के सत्यपाल सिंह भाजपा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तक रहे, लेकिन वेस्ट यूपी के जाटों का कारवां उनके पीछे चलता नहीं दिखा। मुजफ्फरनगर में नरेश बालियान के अलावा सोहनवीर सिंह राम लहर में जीते जरूर, लेकिन वह भी जाटों का नेतृत्व नहीं कर सकें। बिजनौर में भारतेंद्र सिंह भाजपा के सांसद है। कैराना सीट से दिवंगत पूर्व राज्यपाल वीरेंद्र वर्मा ने भाजपा के टिकट पर अपने खुद के वजूद से जीत हासिल की, लेकिन यह कड़वा सच है कि भाजपा में उनकी पहचान बड़े जाट लीडर के तौर पर नहीं हुई। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद डॉ. संजीव बालियान लोकसभा पहुंचे। युवा तुर्क बताकर उन्हें आगे बढ़ाया गया। भाजपा का एक धड़ा उन्हें जाट लीडर के तौर पर पेश करने लगा, लेकिन एकाएक उनसे इस्तीफा ले लिया गया। भाजपा के टिकट पर जाटों ने सीटें जीतीं और मंत्री भी बनें, लेकिन जाटों का काफिला किसी के पीछे चलता हुआ नहीं दिखा।

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