ज्यादातर करदाताओं को पसंद आ रही पुरानी व्यवस्था
मेरठ। वित्तीय वर्ष 2020-21 की समाप्ति नजदीक आने के साथ ही नौकरीपेशा वर्ग से लेकर व्यापारी और पेंशनर्स तक आयकर विभाग को अपनी आमदनी और खर्च की जानकारी देने की तैयारी कर रहे हैं। इस बार आयकर के दायरे में आने वाले केंद्र सरकार की ओर से एक साल पहले घोषित दो व्यवस्थाओं के फेर में फंस गए हैं।
पुरानी व्यवस्था में आयकर के तीन स्लैब हैं, जबकि नई में छह स्लैब का प्रावधान किया गया है। लेखा-जोखा प्रस्तुत करने से पहले उन्हें इसे समझने में दिक्कत हो रही है। इसके लिए चार्टर्ड एकाउंटेंट और कर सलाहकारों से सलाह ली जा रही है। दोनों व्यवस्थाओं में अंतर समझने के बाद ज्यादातर नौकरीपेशा वर्ग और 10 लाख से कम आय वाले व्यापारी पहले से प्रचलित व्यवस्था के तहत ब्योरा बना रहे हैं, वहीं 10 लाख से अधिक आय वर्ग वाले ज्यादातर लोग नए प्रावधान अपना रहे हैं।
जानकारों के मुताबिक पुराने स्लैब में 2.5 लाख रुपये तक पर टैक्स नहीं हैं। 2.5 से 5 लाख तक की आय वालों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करना अनिवार्य हैं लेकिन उन्हें सेक्शन 87 ए के तहत 12,500 रुपये की छूट मिल जाएगी। साथ ही सेक्शन 80 सी के तहत एलआईसी, पीएफ, एनएससी, हाउसिंग लोन आदि पर डेढ़ लाख रुपये का लाभ मिलेगा। गृह ऋण पर भी दो लाख रुपये तक की छूट का प्रावधान है, जबकि 80 डी के तहत मेडिक्लेम में 40 हजार रुपये तक का लाभ मिल सकता है। वेतनभोगियों को स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ उनके वेतन के अनुपात में मिलेगा। मोटे तौर पर पांच लाख रुपये तक की आय वालों को टैक्स का भुगतान नहीं करना होगा।
नए कर प्रावधानों में भी 2.5 लाख रुपये तक टैक्स नहीं लगना है। 2.5 से 5 लाख रुपये की आय वालों पर पुरानी व्यवस्था के अनुसार 87 ए के तहत 12.5 हजार की छूट मिलेगी। ऐसे में यहां भी 5 लाख रुपये तक कर का भुगतान नहीं करना होगा। नए टैक्स स्लैब को 2.50-2.50 लाख में विभाजित किया गया। 5 लाख से 7.5 लाख तक 10 प्रतिशत टैक्स देना होगा, जबकि 7.50 लाख से 10 लाख रुपये तक की आमदनी पर 15 प्रतिशत कर का भुगतान करना होगा।
नौकरी करने वाले पुरानी व्यवस्था अपनाएं
कर योग्य आय पांच लाख से कम और 15 लाख से अधिक है तो दोनों कर व्यवस्था समान हैं। नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए पुरानी व्यवस्था ठीक है। व्यापारियों के लिए व्यवस्था उनकी आय पर निर्भर करती है। बचत कर वह 1.50 लाख रुपये की छूट ले सकते हैं।
- संजय जैन,चार्टर्ड एकाउंटेंट
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हर साल बदलाव कर सकते हैं वेतनभोगी
कर योग्य आय के आधार पर दोनों कर व्यवस्था में अपनी आय का आकलन करें। वेतनभोगी हर वित्तीय वर्ष में कर व्यवस्था बदल सकते हैं। अधिक खर्च करने वाले युवा नई व्यवस्था अपना सकते हैं।
- अनुपम शर्मा, चार्टर्ड एकाउंटेंट
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प्राथमिकताओं के साथ वित्तीय लक्ष्य देखें
छोटी और लंबी अवधि की प्राथमिकताएं तय करने के साथ साथ वित्तीय लक्ष्यों का भी ध्यान रखें। महंगाई और बढ़ती जरूरतों के कारण जल्दी ही छोटी-छोटी बचत शुरू कर दें। इससे आपको फायदा होगा।
- केपी सिंह, चार्टर्ड एकाउंटेंट
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नई व्यवस्था में बचत का लाभ नहीं
लोग पुरानी व्यवस्था ज्यादा पसंद कर रहे हैं। युवा, वरिष्ठ नागरिक, वेतनभोगी और व्यापारी हर कोई कुछ न कुछ बचत करता है। नई व्यवस्था में बचत का कोई लाभ नहीं मिलेगा। नई व्यवस्था में यह बड़ी खामी है हालांकि इसमें टैक्स स्लैब के अनुसार कम हैं।
-- संजीव गुप्ता, कर सलाहकार
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टैक्स स्लैब प्रचलित व्यवस्था नई व्यवस्था
0-2.50 लाख कर नहीं कोई कर नहीं
2.50- 5.00 लाख 5 प्रतिशत 5 प्रतिशत
5.00- 7.50 लाख 20 प्रतिशत 10 प्रतिशत
7.50-10 लाख 20 प्रतिशत 15 प्रतिशत
10- 12.50 लाख 30 प्रतिशत 20 प्रतिशत
12.50- 15 लाख 30 प्रतिशत 25 प्रतिशत
15 लाख से अधिक 30 प्रतिशत 30 प्रतिशत
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एसआईपी और इक्विटी लिंक्ड प्लान में बढ़ा निवेश
मेरठ। बैंकों में सावधि जमा (एफडी) और आवर्ती जमा (आरडी) में ब्याज दर कम होने से लोग व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) और कर बचाने के लिए इक्विटी लिंक्ड टैक्स सेविंग प्लान में निवेश कर रहे हैं। साथ ही गोल्ड ईटीएफ के साथ कैपिटल गेन बांड में भी पैसा लगाया जा रहा हैं। शहर में प्रतिमाह 80-100 करोड़ तक विभिन्न फंड में लगाया जा रहा हैं। म्युचुअल फंड सलाहकार मुकेश गुप्ता का कहना है कि वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले लोग टैक्स सेविंग फंड में निवेश कर रहे हैं। इक्विटी लिंक सेविंग प्लान में एचडीएफसी, यूटीआई, आदित्य बिरला सनलाइफ में निवेश पर 1.5 लाख रुपये तक की कर बचत का प्रावधान है। शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जोखिम से डरने वाले और लंबे समय के निवेशकों के लिए म्युचुअल फंड सबसे बेहतर विकल्प हैं।