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बढ़ती उम्र में भी नहीं डिगे कांवड़ियों के कदम

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आशुतोष भारद्वाज
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मेरठ। हाईवे से गुजरने वाले कुछ कांवड़िये ऐसे भी हैं जो कांवड़ यात्रा की सिल्वर जुबली पूरी कर चुके हैं। बढ़ती उम्र में भी इन कांवड़ियों के कदम नहीं डिगे। कई भक्तों की तो ये 26वीं या 33वीं कांवड़ है। कांवड़ लाने वालों में महिलाओं की संख्या भी हर साल बढ़ रही है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, दिल्ली, गुरुग्राम की महिलाएं भी कांवड़ ला रहीं हैं।
33वीं कांवड़
सूबेदार मेजर के पद से रिटायर्ड हूं। 75 साल का हो चुका हूं। इस बार वे 33वीं कांवड़ ला रहा हूं। - ओम प्रकाश, निवासी इच्छापुरी, गुड़गांव।
सफाई पर दिया ध्यान
पति ओम प्रकाश के साथ 25 वीं कांवड़ ला रही हूं। इस बार मार्ग पर सफाई का विशेष ध्यान दिया गया है। वृक्षों की डालियां भी काटी गई हैं। शौचालय आदि का भी हर जगह प्रबंध है। - विमला देवी, निवासी इच्छापुरी, गुड़गांव।
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विद्युत पोल पर केसरिया पन्नी
मार्ग पर सभी पोल पर केसरिया पन्नी लगाई गई हैं। जो दूर से दिखाई देती हैं। सुरक्षा आदि की व्यवस्था सही है। कांवड़ लाने के कारण परिवार में सुख शांति हैं। अपने सभी दायित्वों को भगवान शिव की कृपा से सकुशल पूर्ण कर पाया हूं। - राजकुमार निवासी गुड़गांव।
नई ऊर्जा का संचार
कांवड़ यात्रा करने से नई ऊर्जा का संचार होता है। पूर्व के वर्षों के मुकाबले अब कांवड़ यात्रा अब बहुत सुखद हो गई है। ये मेरी 26 वीं यात्रा है। चिकित्सा सुविधाएं भी मार्ग में उपलब्ध हैं। - नरेंद्र कुमार निवासी रोहिणी दिल्ली।
शिव ही हमारे इष्ट
ये मेरी 28 वीं कांवड़ है। मेरी उम्र अब 75 वर्ष हैं। हर साल शिवरात्रि पर शिवालय में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करता हूं। ऐसा करने से हृदय में आनंदित हो जाता है। भगवान शिव हमारे इष्ट हैं। - संतरपाल महाराज निवासी वृंदावन।
कांवड़ देती है शक्ति
यात्रा के दौरान कष्ट सहन करने से हमारी इच्छा शक्ति मजबूत होती है। दैनिक जीवन में भी हम कष्टों का सामना कर उन्हें पार कर जाते हैं। भगवान का भी शुभ आशीष प्राप्त होता है। - करतार सिंह निवासी गुड़गांव।
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शिव की महिमा अपरमपार
कांवड़ यात्रा का इतिहास बहुत बड़ा है। हरिद्वार के अलावा अन्य ज्योतिरलिंग पर भी लोग जल चढ़ाते हैं। बिहार स्थित ज्योतिरलिंग पर भी मैं जलाभिषेक कर चुका हैं। भगवा शिव की पूजा से कोई कष्ट नहीं होता है। - रमेश सिंह निवासी गुड़गांव।
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