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अमर उजाला ने खोली कुख्यात धनेंद्र जैन की पोल, प्रशासन ने हटाए गनर, एलआईयू की जांच पर उठे सवाल

Tue, 03 Sep 2019 03:36 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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पेट्रोल पंप पर छापेमारी की कार्रवाई करते आपूर्ति विभाग के अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
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कुख्यात भूपेंद्र बाफर और फिर तेल कारोबारी धनेंद्र जैन व उसकी पत्नी को सरकारी गनर देने का मामला लखनऊ तक गूंज गया है। इसको लेकर पुलिस-प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। धनेंद्र जैन का आपराधिक रिकॉर्ड छुपाकर गनर दिए गए हैं। सवाल है कि लोकल इंटेलीजेंस ने पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की। अमर उजाला ने धनेंद्र जैन की पोल खोली। उसके बाद मेरठ और बागपत पुलिस ने गनर वापस लिए। 

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एसएसपी अजय साहनी के मुताबिक पेट्रोल पंप मालिक धनेंद्र जैन और उसके परिवार की आपराधिक कुंडली खंगाली जा रही है। धनेंद्र जैन ने बागपत और उसकी पत्नी ने मेरठ से गनर लिए थे। मेरठ प्रशासन ने रविवार रात ही धनेंद्र जैन की पत्नी की सुरक्षा में तैनात गनर को तत्काल प्रभाव से वापस लिया तो सोमवार को बागपत प्रशासन ने भी धनेंद्र जैन को दिया गया गनर वापस ले लिया। लेकिन एक गनर जो कि शासन स्तर से धनेंद्र जैन को दिया गया था, वह अभी तैनात है। जिसको हटाने के लिए जिलाधिकारी मेरठ ने शासन को पत्र लिखा है। 

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एलआईयू की जांच पर सवाल 
बड़ा सवाल एलआईयू पर खड़ा होता है। जिला समिति में डीएम, एसएसपी व सीओ एलआईयू होते हैं। सीओ एलआईयू की रिपोर्ट पर दोनों अधिकारियों के हस्ताक्षर होते है। उसके बाद पुलिस लाइन से गनर देने की संस्तुति होती है। अब सवाल उठता है कि भूपेंद्र बाफर और धनेंद्र जैन की रिपोर्ट एलआईयू ने कैसे दी, इसकी भी जांच होनी जरूरी है। इसको लेकर बड़ी कार्रवाई हो सकती है, क्योंकि धनेंद्र जैन पर हत्या का आरोप था।

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तत्कालीन आईजी ने दिया था गनर
धनेंद्र जैन को एक गनर तत्कालीन आईजी रामकुमार वर्मा ने दिया था। सिपाही की बागपत से पोस्टिंग थी और उसको मेरठ से अटैच किया गया था। गनर देने में धनेंद्र जैन ने क्या हवाला दिया था, इसकी जांच उच्चस्तर से की जा रही है। आईजी आलोक सिंह को गनर होने का पता चला, तभी उसको हटाया गया। पुलिस ने बागपत से भी उसका रिकॉर्ड मांगा है।   

बागपत से मिला गनर भी हटाया
तेल कारोबारी धनेंद्र जैन को बागपत से दिया गया गनर भी हटा लिया गया है। शासन ने मामले की जानकारी ली। एक साल पहले मंडलीय समिति की संस्तुति पर गनर दिया गया था। दूसरे गनर की समय अवधि पूरी होने के कारण उसे मूल तैनाती स्थल पर बागपत भेजने के लिए आईजी को पत्र लिखा गया है। आरआई बागपत किशोर रौतेला ने बताया कि धनेंद्र जैन को चार अगस्त 2018 को बागपत से गनर दिया गया था। जैन ने मेरठ से बड़ौत आवागमन के दौरान सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए गनर की मांग की थी। 

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इसके बाद मंडलीय समिति की संस्तुति के आधार पर हेड कांस्टेबल सतवीर को दिया गया था। सोमवार को सतवीर को हटा लिया गया है। अधिकारियों ने पूरे मामले की जानकारी ली है। इसके अलावा बागपत के सिपाही योगेश को आईजी कार्यालय से संबद्ध किया गया था। मेरठ से योगेश को गनर के तौर पर धनेंद्र जैन के साथ भेजा गया था।

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