प्रदेश में सत्ता बदलते ही पुलिस अफसरों के सुर भी बदलने शुरू हो गए हैं। कुछ अफसरों ने तो सत्ताधारी नेताओं के करीबी रहे सिपाहियों, दरोगाओं और इंस्पेक्टरों को लेकर भड़ास निकालनी शुरू कर दी है। एक अफसर ने तो यहां तक कह दिया कि अब न तो पुलिस पिटेगी और न थानों से जबरन छुड़ाकर ले जाने का खेल होगा। वहीं, पांच साल से अपना रसूख दिखाकर मनमर्जी पोस्टिंग पाने वाले पुलिसकर्मियों को ट्रांसफर का डर सताने लगा है। कुछ पुलिसकर्मियों ने तो वर्दी पर लगने वाली नेमप्लेट से अपना सरनेम ही गायब कर दिया है।
सपा सरकार में पिछले पांच साल में पुलिस महकमे में सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक अपने रसूख के चलते अफसरों पर भारी पड़े हैं। शहर के मलाईदार थानों में तैनाती पाई। जो एक बार शहर के अच्छे थाने में तैनात हो गया, उसे हटाने के प्रयास में ही अफसरों को पसीने आ गए। भले ही उस थाना क्षेत्र में वारदातों की झड़ी लग गई हो। दूसरे जिलों से जब भी कोई मजबूत दरोगा या इंस्पेक्टर जिले में आया तो अधिकारियों पर दबाव डलवाकर थाने का चार्ज लिया। कई दरोगाओं ने तो नियम विरुद्ध होकर भी थाने का चार्ज चलाया। कई सिपाही तो थाने में वर्दी तक पहनना भी पसंद नहीं करते थे। लेकिन सत्ता बदलते ही अपनी नेम प्लेट से सरनेम बदलकर कुमार या सिंह लिखवाना शुरू कर दिया है।
अब नहीं होगा पुलिस पर हमला
सूबे में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद एक पुलिस अधिकारी ने तो शनिवार को यहां तक कह दिया था कि अब पुलिस पर हमले नहीं होगे। नाम न छापने की शर्त पर उनका कहना था कि कुछ लोग सत्ता के नजदीक होकर पुलिस पर हमला बोलते थे। बाद में उन्हीं को थानों से छुड़वाने के लिए भी दबाव डलवाते थे। पुलिस अफसरों का यहां तक का भी मानना है कि अब पुलिस बिना किसी दबाव के काम करेगी तो अपराध भी कम होंगे।
भाजपाइयों की शरण में अधिकारी
प्रदेश में भाजपा के हाथ में कमान आते ही अब पुलिस महक में बदलाव होना है। ऐसे में अब पुलिस अधिकारी भाजपा नेताओं की शरण में पहुंचने लगे हैं। चर्चा रही कि होली पर जीत की बधाई देने के बहाने अफसर अपना गणित बैठाने में लगे हैं।