मेरठ। फसलों की बुवाई के समय डीएपी को लेकर मारामारी मचती है। सहकारी समितियों पर खाद की कमी का रोना रोया जाता है। किसान एनपीके को डीएपी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करते हैं। अब सरकार ने एनपीके की कीमत 250 रुपये बढ़ाकर 1470 से 1720 रुपये प्रति बोरा कर दी है। जिससे फसलों की लागत बढ़ने से किसानों को झटका लग सकता है।
गन्ने की बुवाई चल रही है। कई सहकारी समितियों पर डीपीए का संकट है। प्रशासन का दावा है कि सहकारी समिति, बफर और प्राइवेट दुकानों के गोदामों में पर्याप्त मात्रा में डीएपी, एनपीके, टीएसपी और यूरिया खाद जमा है। किसानों के सामने संकट खड़ा है। डीएपी नहीं मिलने पर किसान एनपीके को विकल्प के रूप में इस्तेमाल करते हैं। डीएपी के रेट 1350 रुपये प्रति बोरा हैं वहीं अब एनपीके के दाम बढ़ने के कारण किसान परेशान हैं। कृषि अधिकारी राजीव कुमार का कहना है कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है। खाद कंपनियों से मिली जानकारी के अनुसार एनपीके के दामों में बढ़ोतरी हुई है। एनपीके खाद पर बढ़ाए गए दामों के विरोध में किसान भी आक्रोशित हैं।
सरकार ने तोड़ दी किसानों की कमर
एक तरफ सरकार किसानों की खेती की लागत कम करने और आय दोगुनी करने की बात कर रही है। वहीं खाद, बीज, कृषि यंत्र महंगे किए जा रहे हैं। एनपीके पर 250 रुपये महंगाई का मतलब किसानों की कमर तोड़ना है। भारतीय किसान यूनियन टिकैत इसका विरोध करती है। शीघ्र ही आंदोलन शुरू कर सरकार को घेरने का काम किया जाएगा। - अनुराग चौधरी, जिलाध्यक्ष
किसानों के साथ हो रही है ठगी
एनपीके खाद के रेट बढ़ा दिए हैं। किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम तक नहीं मिल रहा है। सहकारी समितियों से किसान जो ऋण लेते हैं उस पर भी आठ प्रतिशत ब्याज दर से पैसा जमा करने के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। किसान आने वाले चुनाव में सरकार को सबक सिखाने का काम करेंगे। भाकियू पथिक सरकार को घेरने का काम करेगी। - रविंद्र गुर्जर, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन पथिक