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अब शुरू होगी सपा जिलाध्यक्ष की असल चुनौती

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मेरठ। समाजवादी पार्टी में गुटबाजी खत्म नहीं हो रही है। जिला पंचायत और विधानसभा चुनाव की तैयारियां पार्टी के लिए सिरदर्द बनेंगी। हालांकि गुटबाजी खत्म करने के लिए जिलाध्यक्ष की घोषणा के बाद अब पांच सितंबर तक जिला कार्यकारिणी का गठन किया जाना है। इसके बाद पार्टी की बैठकों में पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य एवं विशेष आमंत्रित सदस्य ही शामिल हो पाएंगे।
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जिले में सपाइयों के कई गुट बने हुए हैं। ये अलग-अलग बैठकें करते हैं, विरोध प्रदर्शन भी इनका अलग अलग ही होता है। हाल ही में सपा जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह और अतुल प्रधान आदि ने एनसीईआरटी की नकली किताबों के मामले में पार्टी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। वहीं, पूर्व जिला अध्यक्ष जयवीर सिंह और पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद आदि अलग एडीजी से मिले। ऐसा पिछले काफी समय से हो रहा है। जहां एक गुट जाता है वहां दूसरा उसमें शामिल नहीं होता है। इससे छोटे स्तर पर भी ऐसे ही कई गुट बन गए हैं। पार्टी को जिले में मजबूत बनाने में गुटबाजी नुकसानदेह साबित हो सकती है। इसकी भनक सपा के आलाकमान को भी है। हालांकि अभी कोई सख्त निर्णय नहीं लिया गया है।
जिलाध्यक्ष को लेकर एक साल से चल रही खींचतान चल रही थी। यही कारण रहा कि जिलाध्यक्ष चुनने में इतना समय लगा। फिर से पूर्व जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह पर भरोसा जताया गया। उनकी असल चुनौती अब शुरू होगी। उन्हें न सिर्फ मजबूत विपक्ष की भूमिका का निर्वहन करना होगा बल्कि पार्टी के सभी धड़ों को एकसूत्र में बांधना होगा। हालांकि यह इतना आसान नहीं है। मुख्य रूप से तीन धड़ों के इर्द गिर्द घूमने वाली सपाई राजनीति में बाकी दो धड़े अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। इसलिए विभिन्न मुद्दों पर लड़ाई लड़कर पार्टी के अस्तित्व को बचाए रखना एवं अपनों को साधना समय की बड़ी चुनौती हैं।
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वर्जन
सपा कार्यकर्ता एकजुट होकर भाजपा की जनविरोधी नीतियों का विरोध कर रहे हैं। अलग-अलग विरोध हो रहा है परंतु सभी पार्टी के लिए कार्य कर रहे हैं। अलग-अलग ही सही, पार्टी को मजबूत कर रहे हैं। सभी कार्यकर्ता जल्द एक मंच पर होंगे।-राजपाल सिंह, जिलाध्यक्ष सपा
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