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Meerut News: अब लौटने लगा पांडव टीले का हजारों वर्ष पूर्व खोया वैभव

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सुधा खटीक चेयरपर्सन नगर पंचायत हस्तिनापुर फोटो खबर पांडव टीला हस्तिनापुर
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पांडव टीले को संरक्षित कर सुंदर और भव्य बना रहा पुरातत्व विभाग
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रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर। महाभारत कालीन ऐतिहासिक नगरी में मौजूद प्राचीन पांडव टीले उल्टा खेड़ा को संरक्षित कर इसका सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। पुरातत्व विभाग पर्यटक सैलानियों के लिए यहां हर सुविधा को धरातल पर उतारने में लगा है। इससे पांडव टीले का हजारों वर्ष पूर्व खाेया वैभव लौटने लगा है। यहां पर्यटक सैलानियों की संख्या लगातार बढ़ रही है जो हस्तिनापुर में पर्यटन के लिए एक सुखद समाचार है।
ऐतिहासिक नगरी में यह स्थान महाभारत कालीन माना जाता है। प्राचीन और महत्वपूर्ण स्थान होने के चलते यह पूरी तरह आज पुरातत्व विभाग के अधीन है। इसका संरक्षण पुरातत्व विभाग 1952 से करता आ रहा है। महाभारत काल से जुड़े कई स्थल इस टीले पर मौजूद हैं। यहां पूर्व में हुए उत्खनन से जमीन से पांच वर्ष साल पुराना इतिहास पुरातत्व विभाग को मिल चुका है। प्राचीन स्थल को संरक्षित करने के लिए सरकार द्वारा मुहिम चलाई गई। इसके तहत पुरातत्व विभाग ने करोड़ाें रुपये लगाकर पांडव टीले को विकसित किया है।
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यहां पर्यटकों के लिए बैठने और पानी की भी निश्चित व्यवस्था की गई है। रास्तों को दुरुस्त किया गया है और जातकों को आकर्षित करने के लिए सुंदर-सुंदर फुलवारी लगाई गई है। यहां मौजूद प्राचीन महलों की दीवारों को भी संरक्षित कर चमकाया गया है। कुछ समय पहले यह प्राचीन स्थल खंडहर में तब्दील होकर अपनी पहचान खो रहे थे। सरकार और पुरातत्व विभाग के प्रयास के बाद अब पांडव टीले को अपना खोया वैभव वापस मिल रहा है।
इतिहास के जानकारों का कहना है कि महाभारत काल में यह पांडवों की वैभवशाली राजधानी थी। महाभारत के युद्ध के बाद आई प्रलय में यहां सब उलट-पलट हो गया और कई प्राचीन स्थल जमीन में दब गए। हस्तिनापुर का प्राचीन इतिहास आज भी पुराणों में दर्ज है। इसे देखते हुए सरकार ने इसे संरक्षित करने का कार्य शुरू कराया है।

पांडव टीले पर मौजूद हैं प्राचीन स्थल
पांडव टीले पर अमृत कूप, प्राचीन महलों की दीवार, राजा रघुनाथ महल जिसे शांतनु महल भी कहा जाता है, प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर व पुरातत्व विभाग द्वारा उत्खनन किया गया स्थान जहां जमीन में प्राचीन महलों के अवशेष आज भी नजर आ रहे हैं। यह सब हस्तिनापुर के इतिहास की कहानी आज भी बयां कर रहे हैं।

राष्ट्रीय म्यूजियम अभी भी कागजों में अटका
वर्ष 2020 में केंद्र सरकार ने हस्तिनापुर में राष्ट्रीय म्यूजियम बनाने की घोषणा की थी परंतु पांच वर्ष बीतने के बाद भी राष्ट्रीय म्यूजियम अभी कागजों में ही अटका है अगर हस्तिनापुर में राष्ट्रीय म्यूजियम बन गया तो हस्तिनापुर के विकास को गति मिलने के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
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प्रदेश सरकार से प्राचीन स्थलों के जीर्णोद्धार की मांग
नगर पंचायत द्वारा लगातार ऐतिहासिक नगरी के प्राचीन स्थलों के जीर्णोद्धार के लिए शासन को पत्र लिखे गए हैं। द्रौपदी घाट विकसित हो चुका है। अन्य स्थलों को भी विकसित कराया जाएगा। लगातार शासन से पत्राचार चल रहा है। -सुधा खटीक, चेयरपर्सन, नगर पंचायत, हस्तिनापुर

सुधा खटीक चेयरपर्सन नगर पंचायत हस्तिनापुर फोटो खबर पांडव टीला हस्तिनापुर

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