बजट के अभाव में लंबे समय तक अटका रहा ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनकर तैयार तो हो गया। लेकिन इसका बिजली कनेक्शन अटक गया है। आवेदन के बाद भी बिजली विभाग ने कनेक्शन नहीं दिया है। बिजली विभाग कनेक्शन देने से पहले संबंधित विभाग की एनओसी मांग रहा है। अब कार्यदायी संस्था परिवहन विभाग और व्यावसायिक शिक्षा विभाग के बीच हुए एमओयू के कागज खंगालने में लगी है।
कोरोना काल को छोड़ दें तो सामान्य दिनों में आरटीओ में हर माह 5-6 हजार डीएल बनाए जाते हैं। जो बिना ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक के ही खाली औपचारिकता पूरी कर बनाए जाते हैं। लंबे समय से की जा रही मांग के बाद शासन ने मेरठ को ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का तोहफा दिया था। तीन साल पहले करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से साकेत आईटीआई की जमीन पर इसका निर्माण शुरू हुआ था।
दिसंबर 2018 में यह इंस्टीट्यूट परिवहन विभाग के सुपुर्द किया जाना था। लेकिन शासन में कई बार धनराशि की किस्त अटकने से इसके निर्माण में दो साल अधिक लग गए। अब इंस्टीट्यूट की इमारत और ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक तो बनकर तैयार हो गया है। लेकिन बिजली कनेक्शन का मामला फंस गया है।
महीनों से लंबित है आवेदन
कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी निर्माण संघ लिमिटेड (पैकफेड) ने इंस्टीट्यूट के लिए 20 किलोवाट के बिजली कनेक्शन लेने के लिए आवेदन किया। लेकिन महीनों से आवेदन लटका हुआ है। पैकेफेड के अधिशासी अभियंता एसके सिंह का कहना है बिजली कनेक्शन आवेदन के साथ इंस्टीट्यूट से संबंधित सभी कागज लगाकर दिए हैं। लेकिन विभाग आईटीआई के प्रधानाचार्य की एनओसी की मांग रहा है। आईटीआई के प्रधानाचार्य ने एनओसी देने से मना कर दिया है।
अब पावर कारपोरेशन को इंस्टीट्यूट के लिए परिवहन विभाग और व्यावसायिक शिक्षा विभाग के बीच हुए एमओयू की कापी मुहैया कराई जाएगी। इस बारे में पीवीवीएनएल के अधिशासी अभियंता सोनू रस्तोगी ने बताया कि इंस्टीट्यूट के लिए 20 किलोवाट के कनेक्शन का आवेदन तो मिल गया है। लेकिन पूरे कागज पेश नहीं किए गए हैं। जरूरी कागज मिलते ही कनेक्शन दे दिया जाएगा।
इसलिए जरूरी है यह इंस्टीट्यूट
इंस्टीट्यूट का ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक तैयार होने पर डीएल आवेदकों की लिखित परीक्षा के अलावा तकनीकी तौर पर बेहद एडवांस टेस्टिंग ट्रैक पर वाहन भी चलवाकर देखा जाएगा। इसमें वही अभ्यर्थी पास हो सकेंगे जिन्होंने लर्निंग लाइसेंस लेकर गाड़ी चलानी सीखी होगी। इसके अलावा वाहन फिटनेस सेंटर में भी पूर्ण रूप से स्वस्थ वाहन को ही फिटनेस सर्टिफिकेट जारी हो सकेगा।