उपद्रवियों को जारी हुए थे नोटिस
बिजनौर। शासन ने सीए विरोध के दौरान हुए उपद्रव में शामिल उपद्रवियों के खिलाफ मजबूत पैरवी करने को कहा है। जिले में दर्ज हुए 13 मामलों में से तीन में देशद्रोह की धारा में भी मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई है। उपद्रव के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रशासन ने उपद्रवियों की 45 लाख रुपये की संपत्ति कुर्क करने के नोटिस जारी किए थे, जिसके खिलाफ नामजद आरोपी कोर्ट चले गए थे और उन्हें वहां से राहत मिल गई थी।
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में 20 दिसंबर 2019 को जिले भर में खूब बवाल हुआ था। बिजनौर, नहटौर, नजीबाबाद, नगीना, शेरकोट समेत जिले के कई शहरों में नाराज एक वर्ग के लोगों ने कई वाहनों को फूंक डाला था। नहटौर में गोली लगने से दो युवकों अनस और सुलेमान की मौत हो गई थी और तमाम पुलिसकर्मी घायल हुए थे। एक दरोगा को भी गोली लगी थी। इस मामले में जिले भर में कई मुकदमे दर्ज किए गए थे। 148 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इन सभी मुकदमों में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। 23 मामले आर्म्स एक्ट के दर्ज थे। उपद्रव के दौरान निजी व सरकारी संपत्ति को खूब नुकसान हुआ था। उपद्रवियों से इसकी भरपाई करने के निर्देश दिए गए थे। उपद्रवियों को 45 लाख की संपत्ति कुर्क करने के प्रशासन की ओर से नोटिस भी जारी हुए थे, लेकिन उपद्रवी नोटिस के खिलाफ कोर्ट में चले गए। वहां से उन्हें राहत मिल गई। एसपी के मुताबिक सीएए के तीन मुकदमों को चलाने की शासन की ओर से मंजूरी मिली है। इन मामलों में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल हो गई है। आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले थे। कोर्ट में मजबूती के साथ इसकी पैरवी की जाएगी।
पीएफआई फंडिंग की भी हुई थी जांच
विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए बवाल की जांच में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चांदपुर के एक व्यक्ति सहित कई खातों में पैसा भेजने की बात सामने आई थी। उस समय 15 संदिग्ध खातों की पुलिस ने जांच की थी। माना जा रहा है कि ये और अन्य साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने शासन को रिपोर्ट भेजी थी। जिसके बाद शासन देशद्रोह की धारा में मुकदमा चलाने की अनुमति दी।