माह दर माह वाहनों की बिक्री के आंकड़े गढ़ रहे मेरठ में नोटबंदी का असर साफ देखने को मिल रहा है। नवंबर माह के मुकाबले दिसंबर में वाहन बिक्री का आंकड़ा आधे से भी कम पर पहुंच गया। वहीं, आरटीओ का राजस्व भी घटकर 68 फीसदी पहुंच गया।
उदारीकरण के बाद से शहर में वाहनों की बिक्री साल दर साल बढ़ती जा रही है। पिछले दस साल में यह बिक्री एक हजार वाहन प्रतिमाह के मुकाबले बढ़कर 7 हजार प्रतिमाह औसत तक पहुंच चुकी है। लेकिन गत 8 नवंबर 2016 में लागू की गई नोटबंदी ने वाहनों की चाल को पटरी से उतारकर रख दिया। आरटीओ से मिले आंकड़ों पर नजर डालें तो प्राइवेट और कॉमर्शियल श्रेणी के वाहनों की बिक्री को करारा झटका लगा है।
यह सामने आए आंकड़े
नवंबर माह में जहां 6597 प्राइवेट वाहनों की बिक्री हुई थी तो वहीं दिसंबर माह में यह बिक्री घटकर 2989 वाहनों पर पहुंच गई। यानी एक ही माह में वाहन की बिक्री बढ़ने के बजाय 3608 घट गई। यही हाल कॉमर्शियल वाहनों का रहा। नवंबर माह में 274 कॉमर्शियल वाहनों के मुकाबले दिसंबर माह में कुल 149 वाहनों की बिक्री हो सकी। यानी दिसंबर माह में नवंबर के मुकाबले 125 वाहन कम बिके।
राजस्व भी घटा
लक्ष्य पाने की जद्दोजहद में जुटे आरटीओ अधिकारियों की राजस्व घटने से नींद उड़ी है। नोटबंदी के चलते दिसंबर माह का राजस्व लक्ष्य धड़ाम होकर 68 फीसदी पहुंच गया है। इस महीने गिरे राजस्व को लेकर ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के. रवींद्र नायक ने प्रदेश के सभी उप परिवहन आयुक्तों से रिपोर्ट तलब की है। इस पर उप परिवहन आयुक्त ने जोन में आने वाले सभी आरटीओ से इस बाबत रिपोर्ट मांगी है। गाज गिरने के डर से अधिकारियों में खलबली मची है। इस संबंध में बनाई जा रही रिपोर्ट में नोटबंदी का जिक्र किया जा रहा है। नोटबंदी के कारण ही वाहनों की बिक्री कम होने से राजस्व क्षति हुई है।
15 दिसंबर तक लिए गए पुराने नोट
आरटीओ में वाहनों का टैक्स जमा करने में 15 जनवरी तक पुराने नोट स्वीकार किए गए। ट्रांसपोर्टरों ने अपने वाहनों का टैक्स तो दिसंबर माह तक का एडवांस में ही जमा कर दिया। लेकिन नए वाहनों की बिक्री गिरने से रजिस्ट्रेशन फीस और रोड टैक्स में कमी का सामना करना पड़ा। नवंबर के मुकाबले दिसंबर माह में आधे से भी कम वाहनों की बिक्री होेने से राजस्व में कमी आई।