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नोट बंदी के 20 दिन बाद भी बाजार में नहीं दिख रही रौनक, पसरा रहा सन्नाटा

Wed, 30 Nov 2016 01:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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नोट बंदी को 20 दिन हो चुके हैं, लेकिन व्यापार अभी तक मंदा है। इसका कारण बाजार में करेंसी का फ्लो न हो पाना है। बैंकों से लोगों को पर्याप्त पैसा नहीं मिल पा रहा है, ऐसे में व्यापारी अभी तक सदमे की स्थिति में है। हालात ये है कि शुरू के दस दिन जहां बाजार को तगड़ा झटका लगा। इन 20 दिनों में मेरठ के व्यापार को 1500 करोड़ से ज्यादा का फटका लग चुका है।
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टूटा सर्राफा व्यापार
नोट बंदी का सबसे बड़ा असर सर्राफा व्यापार पर पड़ा है। लंबे समय बाद शादियों का सीजन आया है। जो नवंबर से दिसंबर तक का है। ऐसे में सर्राफा कारोबारियों को बड़ी उम्मीदें थी। लेकिन नोट बंदी ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। हाल ये है कि ऑन लाइन ट्रांजक्शन के जरिये ही लोग ज्वैलरी खरीद पा रहे हैं या कुछ जानकार ग्राहकों को कुछ सर्राफ उधारी दे रहे हैं। लेकिन ज्यादा उधारी भी सर्राफा कारोबारियों के लिए संभव नहीं है। क्योंकि सोने के भाव चढ़ते उतरते रहते हैं। ऐसे में उन्हें बेचे गये सोने का स्टॉक अपने पास रखना होता है। एक चौथाई कारोबार ही अब तक हुआ है। जो व्यवस्था नोट बंदी के बाद अब तक नजर आ रही है, उससे नहीं लगता कि कारोबार चढ़ पायेगा।



उधार की चल रहीं सिफारिशें
जब तक नगदी नहीं आएगी, तब तक व्यापार नहीं चल पाएगा। अभी बैंकों से सिर्फ लोगों के घरों के राशन पानी लायक ही पैसा मिल रहा है। ऐसी स्थिति में कपड़ा कौन खरीदेगा। शादी ब्याह वाले भी मजबूरी में कपड़ा खरीदने आ रहे हैं। -नवनीत गर्ग, कपड़ा व्यापारी
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सेल न होने से स्थिति खराब
सर्दियों में विशेष रूप से माल मंगाया जाता है। आर्डर दिया माल आ चुका है, लेकिन सेल नहीं हो रही। स्थिति बहुत खराब है। जो लोग डेबिट या क्रेडिट कार्ड यूज कर रहे हैं, उनसे ही कुछ सेल हो रही है। -चरणजीत सिंह, रेडीमेड शोरूम संचालक

किराना व्यापारियों का खुला कुछ हाथ
नोट बंदी के 20 दिन के दौरान किराना व्यापारियों को आंशिक राहत मिली है। लेकिन अभी भी जिस तरह सर्दियों और शादियों के सीजन में काम होता था, उसकी तुलना में कम ही है। इसमें सबसे चिंताजनक बात ये है कि किराना व्यापारियों को माल उधारी में भी देना पड़ रहा है और थोक व्यापारियों से भी उधार में माल लेने पर थोड़ा महंगाई बढ़ी है।

काम नहीं पकड़ पाया गति
हमारा काम लोगों की दैनिक जरूरतों से ज्यादा जुड़ा है। इसलिए जैसे ही बैंकों से थोड़ी पैसों की निकासी शुरू हुई तो हमारा काम चला है, लेकिन अभी भी पूरी तरह गति नहीं पकड़ पाया है। जब बैंक से पैसे निकालने की सीमा समाप्त नहीं होगी काम नही चलेगा। -पवन गर्ग, किराना व्यापारी

नहीं उबर पा रहा इलेक्ट्रॉनिक व्यापार
नोट बंदी की मार से इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक बाजार भी नहीं उबर पा रहा है। आनलाइन ट्रांजक्शन के जरिये ही भुगतान की सुविधा होने से शादियों के लिए बहुत जरूरी होने पर ही लोग खरीदारी कर रहे हैं। इलेक्ट्रानिक्स में तो हालात सबसे ज्यादा खराब है। लेपटॉप, मोबाइल आदि की बिक्री काफी प्रभावित हुई है। अब बैंकों में पैसा जमा होने के बाद ऑन लाइन ट्रांजक्शन के जरिये कुछ खरीददारी बढ़ी है, लेकिन व्यापार अभी भी 30 प्रतिशत कम है।


थमे हैं ट्रकों के पहिये
नोट बंदी का सबसे बड़ा असर ट्रांसपोर्ट व्यापार पर आया है। नगदी निकालने की सीमा में बंधे ट्रांसपोर्टर सबसे ज्यादा परेशान है। इस समय स्थिति ये है कि लंबी दूरी का माल भेजने से ट्रांसपोर्टर हाथ खड़े करने लगे हैं। ट्रांसपोर्टरों की मानें तो उनका पैसा तो ऑनलाइन आता है, लेकिन ट्रक चालकों, मैकेनिक और अन्य खर्चों में पैसा नगद देना पड़ता है। एक-एक ट्रांसपोर्टर को रोजाना एक लाख से दस लाख रुपये तक नगद की जरूरत होती है। लेकिन बैंक से निकासी 24 हजार की है। तो ऐसे में पैसा कहां से लाएं।
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