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Meerut News: मोबाइल से नहीं, अब सीसीसीटीवी से पकड़े जा रहे अपराधी

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मोबाइल से नहीं, अब सीसीसीटीवी से पकड़े जा रहे अपराधी
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मेरठ। हाईटेक दौर में अपराधी पहले से अधिक शातिर हो गए हैं। सर्विलांस टीम की पड़ताल से बचने के लिए अधिकतर बदमाश अब या तो मोबाइल फोन का प्रयोग ही नहीं कर रहे हैं और करते भी हैं तो उसे लंबे समय तक साथ ही नहीं रखते हैं, लेकिन ऐसे हालात में सीसीटीवी कैमरे ही वारदात का खुलासा करने में अधिक मददगार हो रहे हैं। हाल ही में हुईं 90 फीसदी घटनाओं का खुलासा सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई गतिविधियों के आधार पर ही किया गया है। वहीं, अपराधियों तक पहुंचने के लिए पुलिस के पुराने तरीके अब अधिक कारगर नहीं बचे हैं। इसकी वजह मुखबिरों का पुलिस से तालमेल में कमी और सीसीटीवी जैसे साधनों पर अधिक निर्भरता भी है।
पिछले कुछ साल में पुलिस की पड़ताल का तरीका काफी बदल गया है। पहले मुखबिर तंत्र काफी मजबूत था। अब स्वार्थ और पुलिस के रवैये के कारण अधिकतर मुखबिर सटीक सूचनाएं नहीं दे रहे हैं। पुलिस का उनसे तालमेल भी बिगड़ा है। अधिकारियों के निर्देश पर त्योहारों, चुनावों या बड़े विवादों के समय ही पुलिस जनसंपर्क को बढ़ाती है। अन्य मौकों पर ऐसी सक्रियता नहीं रहती है। इसके चलते ही हाईटेक साधनों पर पुलिस निर्भर हो रही है।
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इस वर्ष की इन प्रमुख घटनाओं में मददगार बने सीसीटीवी
केस एक :
आठ अगस्त को शास्त्रीनगर डी-ब्लाक में रिटायर्ड हेड कांस्टेबल रतनसिंह की पत्नी कौशल सिरोही और धेवती तमन्ना की हत्या हुई। सीसीटीवी कैमरे में दामाद केे दो साथी दिखाई दिए। तब जाकर नौचंदी पुलिस ने दामाद को उठाकर पूछताछ की और हत्या का खुलासा किया
केस दो :
एक सितंबर को हस्तिनापुर में बैंक मैनेजर संदीप कुमार की पत्नी शिखा और पांच साल की बेटी की हत्या हुई। सीसीटीवी कैमरे में संदीप के जीजा हरीश स्कूटी पर जाते दिखाई दिए। तब जाकर पुलिस हत्यारोपी हरीश और उसके साथी गिरफ्तार हुए। वहीं, तीसरे आरोपी ने खुदकुशी कर ली थी।
केस तीन :
24 अप्रैल को लिसाड़ी रोड पर साजिद की हत्या की गई। वारदात सीसीटीवी में कैद हुई और पुलिस ने खुलासा कर आरोपी गिरफ्तार किए
केस चार - 27 सितंबर को नौचंदी क्षेत्र के जैदी फार्म में अमान की हत्या हुई। घटना के बाद भागते आरोपियों की तस्वीर सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई। जल्द ही वारदात का खुलासा हो गया।
केस पांच :
12 नवंबर को सरधना निवासी रोडवेज की लिपिक सोनिका सोम लापता हुई थीं। उनका शव चार दिन बाद सरधना गंगनहर में मिला। सीसीटीवी कैमरे में सोनिका के दोस्त सनी चौधरी की तस्वीर दिखी थी। बाद में पता चला कि सोनिका की हत्या के बाद सनी ने खुद को गोली मारी।
ऐसे हुई लूट-डकैती करने वालों की पहचान
केस एक :
तीन दिसंबर को कैंट स्थित इंटरनेशनल स्कूल के सामने गैस एजेंसी के कर्मचारियों पर फायरिंग करके बदमाशों ने 1.25 लाख रुपये लूटे थे। पुलिस को सीसीटीवी कैमरे में एजेंसी के एक पुराने कर्मचारी की तस्वीर दिखाई दी, जिससे पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा और घटना का खुलासा हुआ।
केस दो :
20 नवंबर को कमलानगर में बिल्डर प्रदीप गुप्ता की कोठी में नेपाली नौकर बल बहादुर ने अपने साथियों के साथ मिलकर लूट की वारदात की थी। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे देखकर बल बहादुर के दोनों साथियों का नाम पते लगा लिए। आरोपियों की तलाश जारी है।
केस तीन :
26 नवंबर को आबुलेन स्थित होटल में केरल के दो परिवार को जर्मनी में नौकरी लगवाने के नाम पर बुलाकर लूटा। सीसीटीवी कैमरों की मदद से पुलिस नेटवर्क तक पहुंची।
केस चार :
दौराला में सिवाया टोल के पास शाहनवाज ने गोली मारकर 1.26 हजार रुपये लूटने की सूचना पुलिस को दी। यहां लगे कैमरे की फुटेज की पड़ताल के बाद में ही पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की और सूचना देने वाले ने कहा कि ऐसी वारदात नहीं हुई है।
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घटना के समय अधिकतर अपराधी अब मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करते हैं। उनका तरीका बदला है, लेकिन सीसीटीवी कैमरों से बचना आसान नहीं है। इसीलिए शहर में 100 से अधिक स्थलों पर पुलिस के खुद के कैमरे हैं। पुलिस लाइन, कचहरी, एसपी सिटी कार्यालय में कैमरों की मॉनीटरिंग पुलिस करती है। लोग खुद भी जागरूक है। शहर से देहात तक कैमरों लगाए जा रहे हैं। - प्रवीण कुमार, आईजी रेज, मेरठ
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