जीएसटी : पांच दिन में पकड़ी 10 करोड़ की चोरी
मेरठ। जीएसटी की स्पेशल टास्क फोर्स ने पांच दिन की कार्यवाही में 10 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी पकड़ी है। हालांकि सरकारी खाते में अभी छह लाख रुपये जमा हैं, मगर नोटिस की कार्यवाही जारी है। इसके साथ ही 150 से अधिक अपंजीकृत उद्योगों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वहीं, व्यापारिक संगठन भी अब जीएसटी की कार्यवाही का विरोध कर रहे हैं।
जीएसटी का छापा अभियान पांचवें दिन भी जारी रहा। विभागीय सूत्रों के अनुसार पेटीएम और अन्य ऑनलाइन माध्यम से खरीदे या बेचे गए सामानों और खातों से लेनदेन के आधार पर सूची भी तैयार की गई है। ऐसे खातों की अधिक पड़ताल की जा रही है, जिनमें एक दिन में 100 से अधिक बार लेनदेन हुआ है या एक ही तरह के सामान को 50 से अधिक बार मंगवाया गया है।
अपंजीकृत उद्योगों के साथ ही ऐसे 500 से अधिक व्यापारिक प्रतिष्ठान भी चिह्नित किए गए हैं, जिनका पंजीकरण नहीं है और व्यापार कर रहे हैं। इसके साथ ही ऐसे लोगों की भी सूची बनाई गई हैं, जो शॉपिंग स्टोर से लगातार भारी मात्रा में सामान खरीद रहे हैं। इस श्रेणी में तीन दिन की कार्यवाही में ही तीन करोड़ से अधिक का अतिरिक्त कर जमा कराया जाएगा।
दो बड़ी फर्मों की हुई गहन पड़ताल
जीएसटी टीम ने शुक्रवार को शहर में सफायर रीसाइक्लिंग और एसडी रीसाइक्लिंग पर भी कार्यवाही की। इसके साथ ही मवाना, सरधना, किठौर, परीक्षितगढ़ सहित अन्य जगहों पर जांच की गई।
शनिवार और रविवार को भी होगी कार्रवाई
एडिशनल कमिश्नर एमपी सिंह ने बताया कि स्पेशल टास्क फोर्स की ओर से शनिवार और रविवार को भी कार्यवाही जारी रहेगी। जांच कर रही टीमें अपने स्तर पर अभिलेख जुटाकर कर चोरी और अपंजीकृत इकाइयों का पता लगा रही है।
विरोध में दुकानें बंद कर दीं, बाहर बेचा सामान
हस्तिनापुर। जीएसटी विभाग की कार्यवाही के विरोध में कुछ व्यापारियों ने दुकानों के शटर बंद कर दिए और बाहर खड़े होकर सामान बेचना शुरू कर दिया। दोपहर बाद टीम के जाने पर व्यापारियों ने राहत की सांस ली और अपनी दुकानें खोलकर सामान को बेचा। कुछ दुकानदारों ने कहा कि अधिकतर व्यापारी जीएसटी में पंजीकृत हैं। जांच के नाम पर उन्हें अनावश्यक परेशान किया जा रहा है। शुक्रवार को हस्तिनापुर में जीएसटी विभाग की टीम के आने की जैसे ही भनक लगी तो कुछ लोगों ने दुकानाें के शटर बंद कर दिए। उन्होेंने बाहर सामान बेचकर विरोध भी जताया। वहीं, दुकानों पर सामान खरीदने पहुंचे लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि टीम के लौटने पर शाम को दुकानों पर रौनक बढ़ गई।
ग्लास-एल्युमीनियम उद्योगों के खातों-संपत्तियों को खंगाला
मेरठ। पैरागोन और गुडएक्स ग्लास इंडस्ट्रीज से जुड़े 16 ठिकानों पर शुक्रवार को भी आयकर विभाग की ओर से जांच जारी रही। मुख्य रूप से उद्योगों से जुड़े खातों और संपत्तियों के अभिलेख खंगाले गए। विभागीय सूत्रों के अनुसार टीम पूरे दिन 100 करोड़ से अधिक के कर निर्धारण की कागजी कार्यवाही में जुटी रही। यह जांच आय से अधिक संपत्ति पर केंद्रित रही। कई खातों और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज जुटाए गए हैं। इनके बारे में पूछताछ की गई।
पैरागोन इंडस्ट्रीज दिल्ली और गुडएक्स ग्लास इंडस्ट्रीज में वेस्ट एंड रोड निवासी कमर अहमद काजमी और दिल्ली निवासी दलजीत सिंह दोनों पार्टनर हैं। दोनों उद्योग 30 वर्ष पुराने हैं। आयकर सूत्रों के अनुसार एल्युमीनियम, ग्लास और स्क्रब से संबंधित वस्तुओं की खरीद और विक्रय के बिलों की जांच की गई। शुक्रवार को मवाना रोड स्थित कार्यालय पर भी पड़ताल की। जांच के दौरान दुबई में लगाए जाने वाले प्लांट और विदेशों से होने वाले लेनदेन के बारे में भी जानकारी जुटाई गई।
जांच टीम में एडिशनल कमिश्नर (इन्वेस्टिगेशन विंग) मोहनलाल, इनकम टैक्स ऑफिसर संजय अग्रवाल, इनकम टैक्स ऑफिसर विक्रम सिंह, इंस्पेक्टर बिंदेश्वरी कुमार, इंस्पेक्टर पुष्पेंद्र कुमार, इंस्पेक्टर जबर सिंह, इंस्पेक्टर अशोक कुमार सहित अन्य शामिल रहे। आयकर टीम ने कई बेनामी संपत्तियों के बारे में भी पूछताछ की।
मेरठ में आयकर की कार्यवाही को गाजियाबाद ने लीड किया। वहीं, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ की टीम को गाजियाबाद बुलाया गया। एक-एक टीम में सभी जगह के एक-एक अधिकारी को शामिल किया गया है। मेरठ पहुंचने पर अलग-अलग टीम को उसके जांच स्थल के बारे में बताया गया। आयकर विभाग की ओर से हाल में हुई अधिकतर जांच और कार्यवाही में सरेंडर से ज्यादा असेसमेंट पर जोर दिया जा रहा है। सूत्रों का अनुसार सरेंडर होने पर उद्यमी या व्यापारी कोर्ट में दबाव में सरेंडर की बात कहकर बचाव का प्रयास करते हैं।