मकान-फ्लैट के दाम नहीं बढ़े, हजारों आवंटियों का ब्याज माफ
मेरठ। शहर के विभिन्न इलाकों में अगर आप मकान और फ्लैट लेने की सोच रहें हैं तो एमडीए ने मध्यमवर्गीय लोगों को कुछ राहत दी है। इस बार फिर बोर्ड बैठक में संपत्तियों की दरों को नहीं बढ़ाया गया है। वहीं, हजारों आवंटियों को राहत देते हुए अनुरक्षण (मेंटिनेंस) शुल्क में ब्याज माफ करने का एलान किया गया है। वर्ष-2017 से पहले के अनुरक्षण शुल्क पर ब्याज नहीं लिया जाएगा। वहीं, अगर आपका शुल्क बढ़ा हुआ आया है तो सिर्फ रसीद और शपथ पत्र के साथ एमडीए में जमा कर अपना शुल्क ठीक करा सकते हैं।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए कमिश्नर सुरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में वर्चुअल बैठक हुई। कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्राधिकरण के विकास कार्य धरातल पर दिखने चाहिएं। बैठक में 301 करोड़, 48 लाख, 67 हजार रुपये की आय और 308 करोड़, 54 लाख रुपये के व्यय पर भी मुहर लगी। वहीं, एक बार फिर हवाई पट्टी के विस्तारीकरण से प्रभावित हुए आवंटियों को फ्लैट देने के मामले पर चर्चा हुई। इस प्रकरण में 275 आवंटियों के भवन और भूखंड विस्तारीकरण में चले गए थे। इनमें से 21 का समायोजन कर दिया गया था।
संपत्तियों की किस्तों पर ब्याज दरों को एकसमान करने पर कमेटी गठित कर दी गई। प्राधिकरण की ईडब्लूएस, एमआईजी, एचआईजी और व्यावसायिक में 8.6 प्रतिशत ब्याज देय करने पर सहमति का प्रस्ताव भी रखा गया। वहीं, अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण के लिए दो लोडर मशीन को खरीदने और अलावा अयोध्या नगर के की तर्ज पर सिटी डेवलपमेंट प्लान तैयार करने पर पर मंथन हुआ। बताया गया कि विभिन्न विभागों से वार्ता करने सिटी डेवलपमेंट प्लान तैयार होगा।
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ये मिला है लाभ
मकान और फ्लैट - वर्ष 2017-18 से एमडीए ने शताब्दीनगर, गंगानगर, लोहियानगर, श्रद्वापुरी, पल्लवपुरम आदि प्रमुख इलाकों में निर्मित और अर्द्धनिर्मित भवन और फ्लैट पर कोई दाम नहीं बढ़ाए हैं। आप यहां मौजूद 1157 संपत्तियों को पुरानी दरों पर ही खरीद सकते हैं। यहां 180 वर्ग मीटर से लेकर 23 वर्ग मीटर तक आवास और फ्लैट मौजूद हैं। इनकी कीमत छह लाख रुपये से लेकर 23 लाख रुपये तक है।
अनुरक्षण शुल्क - हजारों आवंटियों को अब एमडीए के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। शहर की कई कॉलोनियों में प्राधिकरण ने आवंटियों द्वारा जमा अनुरक्षण शुल्क पर भी ब्याज लगाकर भेज दिया। अब वर्ष-2017 से पहले के अनुरक्षण शुल्क पर ब्याज को माफ कर दिया गया है। वहीं, अगर इसके बाद भी आपका बिल बढ़ा हुआ आता है और आप रसीद और शपथ पत्र देकर उसे ठीक करा सकते हैं। अभी तक बैंक से मिलान और प्राधिकरण अपना डाटा खंगालने के बाद उसे कम करता था। जिससे आवंटियों का डाटा नहीं मिल पा रहा था।
बिल्डर्स को लाभ - अगर आप एक हेक्टेयर से अधिक पर निर्माण कर रहे हैं तो आपको विकास शुल्क उतना ही देना होगा, जितने क्षेत्रफल में आप निर्माण कर रहे हैं। आप उस विकास शुल्क को किस्तों में भी दे सकते हैं। अभी तक कुल क्षेत्रफल पर विकास शुल्क लिया जाता था।
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एक नजर में लेखाजोखा...
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वित्तीय वर्ष - 2021-22
- 308 करोड़, 54 लाख रुपये का कुल व्यय होगा
- 65 करोड़ 99 लाख रुपये राजस्व पर खर्च होगा
- 242 करोड़, 55 लाख रुपये विकास कार्य, उद्यान, बाहा विकास कार्य, प्रधानमंत्री आवास आदि पर खर्च होगा
- 301 करोड़, 48 लाख, 67 हजार रुपये की आय प्रस्तावित
- ई-नीलामी सहित अन्य कार्यों से आय का भी प्रस्ताव
- वित्तीय वर्ष -2020-21 में कुल आय 58 करोड़ रुपये रही और कुल खर्च 85 करोड़, 28 लाख रुपये रहा
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