सामान्य किसान रहे दूर, कार्यकर्ता ही नजर आए
सरधना/हस्तिनापुर/परीक्षितगढ़। भारत बंद में सामान्य किसान और व्यापारी वर्ग शामिल नहीं हुआ। सरधना में मंगलवार को सामान्य दिनों की तरह बाजार खुला और बाजारों में भीड़ भी रही। किसान भी खेतों में गन्ने की छिलाई व अन्य कार्य करते नजर आए। पुलिस की चेतावनी की वजह से किसी ने दुकानों को बंद कराने का प्रयास भी नहीं किया। वहीं हाईवे जाम करने और धरना प्रदर्शन में भाकियू, रालोद, सपा और कांग्रेस के पदाधिकारी व कार्यकर्ता ही दिखाई दिए। थानाध्यक्ष ब्रिजेश कुमार सिंह भी लगातार नगर में भ्रमण कर जायजा लेते रहे।
हस्तिनापुर में भी बंद बेअसर रहा। सुबह से शाम तक लोगों ने दुकानें खोलीं। पुलिस गश्त करती रही। परीक्षितगढ़ नगर व देहात में भी किसान आंदोलन का कोई असर देखने को नही मिला। वाहनों का सामान्य तरीके से आवागमन जारी रहा। कांग्रेस के पूर्व जिला उपाध्यक्ष ने मोहल्ला खजूरी दरवाजा में शांति पूर्ण तरीके से कृषि कानून का विरोध किया। बंद का समर्थन करते हुए कानून वापस लेने की मांग की। इस मौके पर सरताज छोटन, जावेद अली, खीमचंद जाटव, सार्थक शर्मा, प्रियांशु, अमित शर्मा, आजम खां आदि मौजूद रहे।
लावड़ और दौराला क्षेत्र में व्यापारियों ने किसानों के इस ऐलान को समर्थन देने से इनकार कर दिया। रोजाना की तरह बाजार खुले और ग्राहकों की भीड़ उमड़ी। देहात क्षेत्र में भारत बंद का कोई असर नहीं रहा। दौराला हाईवे पर जरूर कुछ घंटे भाकियू ने जाम लगाया। वहां भी किसान कम और विपक्ष के नेता ज्यादा दिखाई दिए। बाजार पर इसका कोई असर नहीं दिखा। सकौती में भी व्यापारियों ने प्रतिष्ठान खोले। व्यापारी संजय गुप्ता ने बताया कि लॉकडाउन में दुकानें बंद रहने से व्यापारी पहले ही टूट चुका है। अब वह नुकसान झेलने की स्थिति में नहीं है।
बहसूमा और रामराज में भारत बंद का कोई असर नहीं दिखा। क्षेत्र में कही पर भी किसान संगठन व राजनीतिक पार्टी ने विरोध प्रदर्शन नहीं किया। किसान ने खेतों में गन्ने की छिलाई की और क्रय केंद्रों पर भेजा। फलावदा में भी सभी दुकानें खुली रहीं। वहीं मवाना मार्ग पर किसान सेवा केंद्र इंडियन ऑयल कंपनी के पेट्रोल पंप को सैयद ईसा ने किसानों के आह्वान पर बंद रखा।
जानीखुर्द में भी चक्का जाम और बाजार बंद का कोई असर नहीं दिखाई दिया। कुछ किसान जानी गंगनहर पर जाम लगाने के लिए पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें समझा बुझाकर लौटा दिया। पुलिस सुबह से ही जानी, सिवाल, धौलड़ी आदि के बाजारों में गश्त करती रही। बाजार रोज की तरह खुले। खरीददार कम नजर आए। दिन में कुछ समय के लिए मेरठ बागपत मार्ग पर बसें बंद रहीं। दोपहर बाद यातायात सामान्य हो गया।
किठौर में भी बंद बेअसर रहा। हालांकि धरना प्रदर्शन रोकने के लिए पुलिस अलर्ट नजर आई। पुलिस ने सुबह से ही छात्र नेता शान मोहम्मद और भीम आर्मी के नेता विकास हरित थाने में बैठा लिया। शाम को मुचलका पाबंद कर छोड़ दिया। शाहजहांपुर मंडी में पुलिस प्रतिष्ठान बंद न करने की अपील की।
‘किसानों के हित में है कानून, बंद रहा विफल’
दौराला। जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष मनिन्दर पाल सिंह ने कहा कि कृषि कानून किसानों के हितों की रक्षा करता है। इस कानून से किसानों को अधिकार होगा कि वह किसी भी कंपनी के साथ अनुबंध करें, उसे फसल बेचें या अपनी फसल को खुले बाजार में बेचें। उसके स्वामित्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मेरठ व बागपत की सभी कृषि सहकारी समितियों में बैठक कर किसानों को इसकी जानकारी दी जा रही है। कुछ विपक्षी दलों के नेता किसानों को गुमराह करना चाहते हैं। मंगलवार को बंद का समर्थन किसानों ने नहीं किया। यह विफल रहा। पूर्व सभासद ऋषिपाल सिंह, अनिल चौधरी जाट महासभा ने भी बंद को विफल बताया। संवाद