संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में आयोजित 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान महोत्सव के 20वें दिन श्रद्धा और भक्ति से विधान में 110 परिवारों ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया। शुभारंभ भगवान जिनेंद्र के पांडुक शिला पर विधिवत जलाभिषेक के साथ हुआ। शांतिधारा राजीव जैन, सारिका जैन, अर्णव जैन, आयुष जैन एवं प्रतीति जैन परिवार ने की।
विधान के दौरान मुनि भावभूषण महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में चारों ओर हिंसा और आतंक का वातावरण दिखाई देता है। मानवता को इस संकट से बाहर निकालने का एकमात्र मार्ग भगवान महावीर द्वारा प्रतिपादित अहिंसा का सिद्धांत है। उन्होंने कहा कि हिंसा ने संसार को आतंकवाद और विनाशकारी हथियार दिए हैं, जबकि अहिंसा ने मानव समाज को एकता, सहयोग और शांति का संदेश दिया है।
मुनिश्री ने कहा कि यदि मानव के भीतर अहिंसा, करुणा और मैत्री की भावनाएं न होतीं तो परिवार, समाज और राष्ट्र की कल्पना भी संभव नहीं थी। जियो और जीने दो, वसुधैव कुटुंबकम्, परस्परोपग्रहो जीवानाम तथा अहिंसा परमो धर्म: जैसे सिद्धांत विश्व शांति की मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि प्रेम, दया, वात्सल्य और करुणा जैसे गुण अहिंसा में समाहित हैं, जिनके माध्यम से मानव अपने भीतर और समाज में शांति स्थापित कर सकता है। अहिंसा ही मानव, प्रकृति और समस्त विश्व के कल्याण का मार्ग है।
शाम को भगवान जिनेंद्र की संगीतमय महाआरती का आयोजन किया गया। इसके बाद जिनेंद्र भक्ति एवं भजन संध्या में श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों पर भावपूर्ण नृत्य कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भक्तों ने 48 दीपकों से भक्तामर आराधना कर प्रभु की आराधना की। बाहर से आए भजन गायकों ने अपने मधुर भजनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
इस मौके पर अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन अनेक श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।
प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद