खरखौदा। अक्तूबर शुरू होते ही रबी की फसल की बुआई की तैयारी शुरू हो गई है। क्षेत्र में सरसों, मसूर, चना, मटर, गेहूं, जौ एवं जेई की बुआई होती है। यहां कई फसलों की अक्तूबर एवं नवंबर में बुआई होती है। इसके बावजूद करीब तीस गांवों के लिए खरखौदा कस्बा में मौजूद राजकीय बीज भंडार पर अभी तक किसी भी फसल का बीज उपलब्ध नहीं है। इससे किसान बाजार से औने-पौने दामों में बीज खरीदने के लिए मजबूर होगा।
खरखौदा विकास खंड क्षेत्र में 30 गांवों के करीब 14 हजार किसान पंजीकृत हैं। क्षेत्र में रबी की बुआई का समय अक्तूबर से शुरू हो जाता है। इसमें सरसों, मटर, चना व मसूर आदि की बुआई शुरू हो जाती है। जिसके लिए किसानों ने तैयारी भी शुरू कर दी है। ब्लॉक का खरखौदा कस्बे में ही राजकीय बीज भंडार है। पूरे ब्लॉक के किसान उसी से जुड़े हैं। उस पर आश्रित भी हैं। अक्तूबर का पहला सप्ताह बीतने को है परंतु राजकीय बीज भंडार पर अभी तक भी उपयुक्त बीज नहीं पहुंचा है। किसानों का आरोप है कि राजकीय बीज भंडार पर किसानों एवं क्षेत्र की मांग के बावजूद बीज नहीं आता है। लखनऊ से कृषि विभाग जो तय करता है वही बीज पहुंच जाता है। हालांकि क्षेत्र की जलवायु एवं भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए बीज की आपूर्ति होनी चाहिए। तिलहन में क्षेत्र में सबसे अधिक काली सरसों की बुआई की जाती है। बीज भंडार पर पीली सरसों का बीज उपलब्ध है। किसानों को मजबूरन बाजार से बीज खरीदना पड़ रहा है। वहीं, दुकानों पर मिलने वाले बीज न तो प्रमाणित हैं न ही उसकी कोई गारंटी है। वहीं, भंडार पर सरसों का फांउडेशन बीज 60 से 70 रुपये प्रतिकिलो मिल जाता है। उधर, बीज प्राइवेट दुकानों पर 500 रुपये किलो तक मिल रहा है।
कृषि विभाग के जरिए बीज की मांग लखनऊ भेजी गई है। जल्द ही बीज गोदाम पर पहुंच जाएगा।-धमेंद्र कुमार, बीज गोदाम इंचार्ज खरखौदा