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कोई नहीं उतार सकता है मां का ऋण

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कोई नहीं उतार सकता है मां का ऋण
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माछरा। सोमवार को होने वाले अहोई माता के व्रत के बारे में पंडित आनंद शर्मा स्वामीपुरा माछरा बताते हैं कि मां से बढ़कर न तो कोई हुआ है न ही हो सकता है। पुत्र के जन्म के साथ ही उस पर तीन ऋण होते हैं। एक पिता दूसरा माता और तीसरा पितरों का। व्यक्ति हर किसी का ऋण उतार सकता है, लेकिन मां का ऋण नहीं उतार सकता है। अहोई अष्टमी का व्रत भी कुछ इसी प्रकार का है। सोमवार को सभी माताएं अपने पुत्रों की दीर्घायु के लिए निर्जल व्रत धारण करेंगी। अहोई माता से अपने लिए कुछ न मांगते हुए अपने पुत्र की दीर्घायु के लिए व्रत रखकर उपासना करेंगी।
अहोई पूजन विधि:- पंडित आनंद शर्मा स्वामीपुरा माछरा पूजन विधि में बताते हैं कि महालक्ष्मी के प्रतीक अहोई माता का निर्जल व्रत माताएं पुत्र की दीर्घायु के लिए रखेंगी। स्याऊ की बनी माला पहनकर, अहोई कथा पढे़गी-सुनेंगी। अहोई माता के सामने सात पूडे़, मूली, गन्ना, मीठी एवं बेसन की बनी पूरी का पूजन के लिए रखा जाना आवश्यक होता है। साथ ही एक हंडिया में जल भरकर उसके सामने गेहूं एवं चावल रखें। घी का दीपक जला, गेहूं के सात दाने मुट्ठी में लेकर कथा पढे़ं। चांद-तारे को अर्घ्य देकर व्रत खोले।
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अहोई के प्रकार:- बहुत से लोग गेरू व रंगों से परंपरागत रूप से दीवार पर अहोई माता को बनाते हैं। वहीं, बहुत से लोग अहोई माता का कलेंडर दीवार पर लगा लेते हैं, लेकिन परंपरागत रूप से दीवार पर गेरु की माता बनाई जाती है।
स्याऊ की है मान्यता:- अहोई के दिन पूजा करने के लिए विशेष रूप से स्याऊ की मान्यता है। स्याऊ के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है। स्याऊ से मतलब चांदी की अहोई से होता है। जिसमें चांदी के दाने डलवाए जाते हैं।
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अहोई की तैयारियां पूरीं:- दीपावली से एक सप्ताह पूर्व मनाएं जाने वाले इस पर्व की तैयारी यूं तो महिलाएं करवाचौथ के उपरांत ही शुरू कर देती है। बाजारों मे अहोई कलेंडर, करवा-कसोरा, दीपक के सजे अनेक स्टॉल पर लगी महिलाओं की भीड़ से मां-बेटे के प्रेमभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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