मेरठ में कुदरत ने जन्म से ही रिया को वो घाव दिया, जिसका दर्द उसे पूरी जिंदगी रहेगा। पांडवनगर निवासी रिया का जन्म से ही बायां हाथ नहीं है। 14 वर्षीय रिया करन पब्लिक स्कूल में 8वीं कक्षा की छात्रा है। एक हाथ न होने के बाद भी रिया का आत्मविश्वास कम नहीं हुआ और उसने जिंदगी में कुछ ऐसा करने का ठान लिया जिससे उसके माता-पिता का नाम रोशन हो। रिया ने अपने मकसद में सफलता भी हासिल की है। वे पिछले कई महीनों से कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में पसीना बहा रही हैं। 14 साल की रिया चार सौ मीटर व आठ सौ मीटर दौड़ में जिला व राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल कर चुकी हैं।
बेटी में है प्रतिभा, कम हुई चिंता
रिया के पिता अंशुमन कुमार पेशे से गाड़ी ड्राइवर हैं। अंशुमन ने बताया बेटी होने पर उनके परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन उसके बायां हाथ नहीं था। पिता ने बताया बेटी को लेकर परिवार के लोग अधिक संवेदनशील होते हैं, यही कारण रहा कि परिवार के लोग चिंतित थे। लेकिन धीरे-धीरे रिया बड़ी हुई तो परिवार के लोगों की चिंता भी कम होती चली गई। रिया अब 14 साल की हो गई है और करन पब्लिक स्कूल में 8वीं कक्षा में है। पढ़ाई में होशियार रिया पिछले एक साल से कोच गौरव त्यागी के पास प्रशिक्षण ले रही हैं। वो चार सौ व आठ सौ मीटर की धावक है। गौरव त्यागी ने बताया रिया का उसका सपना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल करने का है। जिसके लिए रिया प्रतिदिन देापहर को कैलाश प्रकाश स्टेडियम पहुंच जाती है।