अमर उजाला के विशेष अनुरोध पर राज्य सूचना आयुक्त राजकेश्वर सिंह
शुक्रवार को अमर उजाला के मेरठ कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 और उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली-2015 के बारे में विस्तृत जानकारी दी। जिज्ञासाओं का समाधान किया और कहा कि लोकतंत्र में सूचनाओं के संकलन के लिये यह एक दमदार माध्यम है।
खासतौर पर पत्रकारिता से जुड़े लोग इसका बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं। आम आदमी को इस बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूक होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जन सूचना अधिकारी यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकते कि कार्यालय में सूचना उपलब्ध नहीं है। उन्हें इसका कारण बताना होगा।
मसलन, यदि रिकॉर्ड नष्ट किया गया है तो पहले उसका उल्लेख किसी रजिस्टर में दर्ज किया होगा। जलकर राख हो गया है तो क्या उसकी एफआईआर कराई गई। ऐसे तमाम मामले हैं, पर इससे बचा नहीं जा सकता। सूचना देय नहीं है तो बताना होगा कि सूचना धारा-8, 9, 24 के प्रावधानों के मुताबिक देय नहीं है।
थर्ड पार्टी को लेकर स्पष्ट हैं नियम
राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि थर्ड पार्टी सूचना मांगने के मामले में भ्रम की स्थिति नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि यदि किसी टाउनशिप या मॉल के बारे में कोई सूचना चाहता है तो देनी ही होगी।
उसके स्वामी से यह पूछा जाएगा कि आपके बारे में हम सूचना दे रहे हैं। आपको क्या कुछ कहना है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में शासनादेश भी है कि किसी भी टाउनशिप आदि का ले-आउट वेबसाइट पर डालना होगा।
जब वेबसाइट पर इसे डाला जाएगा तो भला सूचना के अधिकार में क्यों इसकी जानकारी नहीं दी जा सकती? कहा कि प्रथम अपीलीय अधिकारी अपने दायित्वों का ढंग से निर्वहन नहीं कर रहे हैं। वे सही तरीके से इसका निर्वहन करें तो पेंडिंग आवेदनों की संख्या में 70 फीसदी तक कमी आ सकती है।
आयुक्त सभागार में चल रहे प्रशिक्षण में
राज्य सूचना आयुक्त राजकेश्वर सिंह ने शुक्रवार को गौतमबुद्धनगर के जनसूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया। कहा कि भ्रामक, कम और अपूर्ण सूचना देना, सूचना न देने की श्रेणी में आता है।
उन्होंने बताया कि आवेदक किसी भी लोक प्राधिकरण से विभिन्न सूचनाएं मांग सकता है, जिसमें किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में धारित अभिलेख, दस्तावेज, ज्ञापन, ई-मेल, मत, सलाह, प्रेस-विज्ञप्ति, परिपत्र, आदेश, लॉग बुक, संविदा, रिपोर्ट, नमूने, मॉडल, आंकड़ों से संबंधित सामग्री और किसी प्राइवेट निकाय से संबंधित ऐसी सूचनाएं, जो विधि के अधीन हाें।
आवेदक को यह अधिकार है कि वह किसी लोक प्राधिकरण में दस्तावेज की प्रति मांग सकता है। दस्तावेज का निरीक्षण कर सकता है। किसी निर्माणाधीन कार्य का निरीक्षण, निर्माणाधीन कार्य की सामग्री का प्रमाणित नमूना आदि ले सकता है।