यह अकेली ऐसी बिल्डिंग नहीं
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अगर इस भवन का जीर्णोद्धार हो जाए तो यह दवा के रखरखाव के काम आ सकता है। फिलहाल मेडिकल कॉलेज परिसर में बने अपर निदेशक स्वास्थ्य के कार्यालय में दवाएं आती हैं और वहीं से इन्हें मेरठ समेत बाकी जिलों को सप्लाई किया जाता है। दूसरी तरफ सवाल यह भी उठता है कि अगर सिर्फ सड़क बनाया जाना ही मसला है तो जब इस बिल्डिंग को बनाया जा रहा था, तब जिम्मेदारों ने इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया।
यह अकेली ऐसी बिल्डिंग नहीं
मेडिकल कॉलेज में 50 वार्डों की प्राइवेट रूम की बिल्डिंग 27 वर्षों से बंद है। अब इसकी सुध ली गई है और इसके 20 वार्ड शुरू कराए जा रहे हैं। बाकी के 30 वार्ड बाद में शुरू कराए जाएंगे। इसी तरह जिला अस्पताल में बने 10 प्राइवेट वार्डों की बिल्डिंग खंडहर होने के कगार पर है। लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
सड़क बने तो बात बने
इस ड्रग वेयरहाउस को मुख्य मार्ग से कनेक्ट करने वाली सड़क की हालत बहुत खराब है, जिसे इस वेयर हाउस के बंद होने का प्रमुख कारण माना जाता है। इस सड़क को बनवाने के लिए करीब चार लाख रुपये की डिमांड शासन को भेजी गई थी। लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिली। इसके लिए कई बार रिमाइंडर भी भेजे जा चुके हैं। सड़क बनाए जाने के बाद ही इसे फिर से शुरू कराया जा सकता है। क्योंकि बिना सड़क बने यहां दवाओं के ट्रक आने-जाने में दिक्कत होगी। -मंजू शर्मा, अपर निदेशक स्वास्थ्य
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