सीओ ब्रह्मपुरी का कॉरपोरेट लुक जैसा ऑफिस सारे नियम ताक पर रखकर दिल्ली रोड पर शिफ्ट किया गया है। संवेदनशील हालात को नजरअंदाज कर ऑफिस शिफ्ट कराने की इजाजत दे दी गई। जबकि शासन से ऐसी कोई अनुमति पुलिस को नहीं मिली। इसको लेकर स्थानीय लोगों मेें जबरदस्त आक्रोश है।
अभिषेक हत्याकांड को लेकर स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। लोगों में पुलिस के प्रति गुस्सा भी है। उनका कहना है कि आम जनता की सुरक्षा के लिए पुलिस थाने और अफसरों के ऑफिस बनाए जाते हैं। शहर के तीन थाने ब्रह्मपुरी, टीपीनगर और परतापुर का सर्किल ऑफिस यानी सीओ ब्रह्मपुरी ऑफिस कई वर्षों से देहली गेट चौराहे पर था। जबकि इन तीन थानों में ब्रह्मपुरी थाने का इलाका अतिसंवेदनशील है। जहां कोई आपराधिक वारदात या सांप्रदायिक घटना कब हो जाए, कोई नहीं कह सकता। लेकिन सीओ ब्रह्मपुरी ने घनी आबादी से बचने के लिए अपना ऑफिस शहर के बाहर शॉप्रिक्स मॉल के सामने बनाया। इसको लेकर स्थानीय लोगोें में आक्रोश है। सवाल उठता है कि आखिर सीओ का ऑफिस किसकी परमीशन पर शिफ्ट हुआ।
कोई कागजी कार्रवाई नहीं
पुलिस सूत्रों ने बताया कि सीओ ब्रह्मपुरी ऑफिस शिफ्ट करने में पुलिस ने सारे नियम कानून ताक पर रख दिए। इसमें कोई कागजी कार्रवाई नहीं हुई और न ही शासन से इसकी मंजूरी ली गई। जनपद में बैठने वाले अधिकारियों ने भी आंख मूंदकर सीओ ब्रह्मपुरी ऑफिस शिफ्ट करने दिया।
पब्लिक बोली, थाने भी शिफ्ट हो जाएंगे
ब्रह्मपुरी के गुस्साए लोगों ने बताया कि पुलिस की ऐसी मनमानी चलेगी तो वह दिन भी दूर नहीं, जब थाने भी अपनी सहूलियत के मुताबिक शिफ्ट होने लगेंगे। पुलिस अधिकारियों को भी अपने ऑफिस भी शहर से बाहर ही बना लेने चाहिए।
ये दिए सीओ ने तर्क
सीओ ब्रह्मपुरी धर्मेंद्र चौहान का कहना है कि उनका ऑफिस सही शिफ्ट हुआ है। मुझे एक नहीं, तीनों थानों को देखना होता है। तीनों थानों की दूरी भी वहां से समान है। बिजली बंबा बाईपास पर रोजाना लूटपाट होती थी, लेकिन जब से ऑफिस शिफ्ट हुआ, वहां कोई लूट नहीं हुई। अपने पुराने ऑफिस में शारदा रोड पुलिस चौकी बनवा दी है। जहां पर 24 घंटे पुलिस तैनात रहती है। मैं खुद दिन में दो बार चौकी पर आता हूं।