उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम द्वारा शहर में कई स्थानों पर बनाए गरीबों के मकानों में हुए भ्रष्टाचार की पोल खोलने के लिए दायमपुर में खड़ी बहुमंजिली इमारत ही काफी है। इस इमारत को बिना पिलर के केवल दीवारों के सहारे खड़ा कर दिया गया। जो भी बना, वह जर्जर हो चला है। छतों और दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं।
सुविधाएं तो भूल ही जाएं
ये मकान गरीबों के लिए बने, इसलिए निर्माण सामग्री में मानकों का भी पूरा मजाक उड़ाया गया। अब हालत यह है कि छतों का पानी मकानों में भर रहा है। काफी मकानों में खिड़की, दरवाजे नहीं हैं। आवंटियों को पीने का पानी, सीवर, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पायी हैं। सरकारी खजाने से 425 करोड़ खर्च करके बनाए गए इन मकानों की नींव भी इतनी कमजोर है कि आवंटी रात गुजारने से भी डरते हैं।
अमर उजाला ने उठाया मुद्दा
अमर उजाला ने बुधवार के अंक में इस भ्रष्टाचार का खुलासा किया। जिसके बाद निर्माण निगम, डूडा और जिला प्रशासन में हलचल मच गयी। शहर भर में इसकी चर्चा होती रही। पूर्व में भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले भी सामने आने शुरू हो गए हैं। उधर, आवंटियों को कुछ ठीक होने की उम्मीद जगी। लेकिन जिला प्रशासन का कोई अधिकारी इस संबंध में बोलता नजर नहीं आया।
फाइलों में दफन होती रही जांच रिपोर्ट
भवन निर्माण में घटिया सामग्री और भ्र्रष्टाचार की शिकायतों पर जिला प्रशासन ने जांच भी करायी। लेकिन जांच रिपोर्ट पूरी होने से पहले ही मामला फाइलों में दफन होता गया। जिला प्रशासन ने भी कभी यहां का हाल नहीं जाना। आवंटियों को अब योगी सरकार से उम्मीद है। हो सकता है कि सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन जांच कराए तो बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा होगा। साथ ही आवंटियों को मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी।