निजी कॉलोनियाें में मेरठ विकास प्राधिकरण अवस्थापना निधि से विकास कार्य नहीं कराएगा। यानी यहां रह रहे लोग पूरी तरह से बिल्डरों पर आश्रित हो गए हैं। जबकि बिल्डर सही तरीके से काम नहीं करा रहे हैं। कैंट विधायक ने ऐसी 11 कॉलोनियों में काम कराने के लिए शासन स्तर पर मांग की थी। जिसका जवाब भेजते हुए एमडीए अधिकारियों ने कहा है कि यहां अवस्थापना निधि से काम कराना संभव नहीं होगा।
यह है प्रकरण
शहर भर में निजी कॉलोनियों की संख्या बढ़ती जा रही है। आवंटी अपनी जमा पूंजी इकट्ठा कर यहां घर तो बना लेता है। लेकिन बाद में परेशानी पैदा हो रही है। काफी कॉलोनियां यहां ऐसी हैं, जहां विकास कार्य हो ही नहीं रहे। बिल्डर मेंटीनेंस चार्ज तक वसूल रहे हैं, पर सुविधाएं शून्य हैं। कई कॉलोनियों में न खंभों पर लाइट हैं और न सड़क। पार्क डेवलप नहीं हैं। पेयजल तक का इंतजाम चंदे से हो रहा है।
विधायक ने उठाई थी आवाज
कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल ने 11 कॉलोनियों में एमडीए से काम कराने की मांग की। बात नहीं बनी तो मामला विधानसभा तक पहुंचा दिया। कहा कि इन कॉलोनियों में एमडीए अवस्थापना निधि से काम कराए। जनता परेशान है और उसे सुविधाएं मिलनी चाहिए। विधायक का कहना था कि यदि कालोनियां हैंडओवर नहीं हो रही हैं तो यह भी नगरनिगम और एमडीए की लापरवाही है। ऐसे में जनता को प्रताड़ित करना गैर तार्किक है।
एमडीए ने हाथ खड़े किए
इस प्रकरण पर एमडीए के वीसी स्तर से शासन को जवाब भेजते हुए कहा कि इन कॉलोनियों में अवस्थापना निधि से काम कराना संभव नहीं। चूंकि इन कॉलोनियों का स्वामित्व अभी बिल्डरों के पास ही है तो वे ही वहां विकास कार्य कराएं। हां, यह हो सकता है कि एमडीए उन पर दबाव बनाकर यहां विकास कार्य कराने के लिए कह सकता है। कॉलोनियों के अभी हैंडओवर न होने से यहां विकास कार्य कराना नियम विरुद्घ होगा।
सौ से ज्यादा कॉलोनियों का मसला
यह मसला केवल विधायक द्वारा उठाई गई कॉलोनियां का नहीं है। शहर में सौ से ज्यादा कॉलोनियां ऐसी हैं जो नगरनिगम को हैंडओवर नहीं की गई है। निगम कॉलोनियां लेने को तैयार नहीं, क्योंकि यहां विकास कार्य पूरे नहीं किए गए हैं। उधर, बिल्डर अब यहां काम नहीं करा रहे हैं, जिससे जनता परेशान है। कई बार अफसरों से बात हुई, पर नतीजा नहीं निकल पा रहा है।
बंधक प्लाट और एफडीआर का ब्योरा तलब
मानचित्र स्वीकृत कराते समय हर कॉलोनी में एमडीए प्लाट बंधक रखता है। साथ ही बिल्डर से बैंक गारंटी भी ली जाती है। उद्देश्य यह होता है कि यदि कॉलोनाइजर विकास कार्य न कराए तो इन्हें बेचकर काम कराया जा सके। विडंबना यह है कि यहां एमडीए अधिकारियों की मिलीभगत से कॉलोनाइजराें ने बंधक प्लाट बेच डाले हैं। एफडीआर रिन्युअल नहीं कराई हैं।
ये हैं कॉलोनियां
अप्पू एन्क्लेव, क्वींस लैंड, सन सिटी, आनंद लोक, गंगोत्री, तिरुपति, उदय पार्क, ग्रेटर पल्लवपुरम, मीनाक्षीपुरम, गणपति विहार एवं अशोक विहार