अतिक्रमण के खिलाफ बनाए गए कानून को नगर निगम की मुहर का इंतजार है। अगर निगम बोर्ड में अतिक्रमण के खिलाफ कानून पर मुहर लग जाए तो शहर की सड़कों को बार-बार अतिक्रमण मुक्त कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि कानून में अतिक्रमण करने वालों पर जुर्माना लगाने का प्राविधान किया गया है।
सड़कों पर अतिक्रमण एक बड़ी समस्या है। जहां सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे हो रहे हैं, वहीं जनता जाम से परेशान है। प्रदेश की नई सरकार ने सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश जारी किया है। जिसका असर देखने को भी मिल रहा है। पिछले तीन सप्ताह से लगातार शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान चल रहा है। माना जा रहा है कि अगर नगर निगम बोर्ड अतिक्रमण के खिलाफ कानून को पास कर दे तो सरकारी मशीनरी को बार-बार अतिक्रमण नहीं हटाना पड़ेगा।
सरकार लगा चुकी है मुहर
नगर निगम प्रशासन द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ बनाई गई उप नियमावली को पिछले साल 16 दिसंबर की बोर्ड बैठक में रखा गया था। इससे पहले प्रदेश सरकार इस कानून पर अपनी मुहर लगा चुका है। लेकिन नगर निगम बोर्ड ने यह पास नहीं हो सका।
ये है कानून
उप नियम के अंतर्गत किसी भी नागरिक को सड़क, सड़क पटरी, नाला पटरी अथवा अन्य सरकारी भूमि पर अपने वाहन खड़ा करने, स्थाई या अस्थाई अन्य तरीके से अतिक्रमण करने पर प्रतिवर्ग फीट प्रतिदिन की दर से आर्थिक दंड का भुगतान करना होगा। इतना ही नहीं अगर किसी के पास एक वाहन है और उस वाहन को खड़ा करने के लिए आवास के भीतर स्थान नहीं है तो ऐसे भवन स्वामियों को छह माह के भीतर वाहन को अपने भवन के अंदर खड़ा करने की व्यवस्था करनी होगी। नियम का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई भी होगी।
करनी होगी पार्किंग की व्यवस्था
उप नियम के अंतर्गत किसी भी नर्सिंग होम, होटल, बैंक्वेट हॉल, मैरिज होम, बैंक और अन्य व्यवसायिक संस्थानों को वाहन पार्किँग की व्यवस्था करनी होगी। अगर इनके सामने सड़क पर वाहन खड़े पाए जाते हैं तो संस्थान से ही प्रत्येक वाहन प्रतिदिन की दर से जुर्माना वसूला जाएगा।
ये लगेगा जुर्माना
अतिक्रमण - जुर्माना प्रति वर्ग फीट की दर से प्रतिदिन
फड़ लगाकर 10
सामान रखना 10
खोका 20
दो पहिया वाहन 10
तीन पहिया वाहन 15
चार पहिया वाहन 20
चार पहिया से अधिक 30
स्थाई अतिक्रमण 50