वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी के चलते नगर निकाय चुनाव टलना तय माना जा रहा है। बताते हैं कि नगर निगम में जो वार्ड परिसीमन हुआ है, उसमें सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को मिलता नजर आ रहा है। संघ परिवार के हस्तक्षेप के बाद योगी सरकार के हरकत में आने पर संभावना है कि निकाय चुनाव सितंबर में कराए जा सकते हैं।
नगर निगम में इस बार 2011 की जनगणना के आधार पर ही वार्डों का परिसीमन हुआ है। जिसमें पहले से चले आ रहे 80 वार्डों की जगह अब 90 वार्ड बनाए गए हैं। लेकिन वार्ड परिसीमन में तमाम नियमों की अनदेखी के बीच परिसीमन इस तरह कर दिया गया कि सड़क पार के मोहल्ले जो कभी एक साथ हुआ करते थे, उन्हें दूसरे वार्डों में शामिल कर दिया गया। यही नहीं, शहर की कई नई कॉलोनियों को वार्ड परिसीमन सूची में शामिल नहीं किया गया।
भाजपाइयों ने ही जतायी आपत्ति
इस परिसीमन पर करीब दो सौ आपत्तियां आयी थीं, जिनमें सबसे ज्यादा भाजपाइयों की तरफ से थीं। सूत्रों की मानें तो इस परिसीमन में सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को ही हुआ है। ऐसे में इन आपत्तियों का निस्तारण कर सूची शासन को भेज दी गयी। लेकिन पूरी तरह आपत्तियों का निस्तारण नहीं हो पाया। भाजपाइयों ने इस मामले में शासन में भी शिकायत की। लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो मामला संघ परिवार जा पहुंचा। भाजपाई सूत्रों का कहना है कि संघ नेताओं ने इस परिसीमन पर चिंता के साथ नाराजगी जतायी है। जिसके बाद यूपी सरकार हरकत में आयी और तमाम शिकायतों पर गौर किया गया तो शिकायतें सही पायी गईं। ऐसे में पूरी संभावना जतायी जा रही है कि चुनाव को टाला जाएगा।
दोबारा हो सकता है परिसीमन
सूत्रों के अनुसार परिसीमन को लेकर आपत्तियों पर दोबारा सुनवाई के साथ यह मामला कोर्ट भी जा सकता है। जिस पर दोबारा परिसीमन की कार्रवाई तय हो सकती है। इसीलिए चुनाव टालने की तैयारी शासन स्तर पर हो रही है। जिसका जल्द आदेश आ सकता है।