- रिटेल केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल ने एआईओसीडी पर उठाए सवाल
- उत्तर प्रदेश से शुरू होगा स्वतंत्र राष्ट्रीय संगठन निर्माण अभियान
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। रिटेल केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल ने कहा कि दवा विक्रेताओं के हितों और सम्मान की लड़ाई के लिए 20 मई से नए आंदोलन की शुरुआत होने जा रही है। वर्षों से दवा विक्रेताओं के नाम पर कार्य कर रही एआईओसीडी (ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट) अब वास्तविक केमिस्टों की संस्था न रहकर दवा कंपनियों के प्रभाव में संचालित मंच बन चुकी है। इस कारण छोटे और मध्यम दवा विक्रेताओं के हित लगातार प्रभावित हो रहे हैं।
सोमवार को लालकुर्ती क्षेत्र में होटल क्रिस्टल में हुई प्रेसवार्ता में उन्होंने यह बात कही। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पिछले लगभग दस वर्षों में एआईओसीडी ने ऐसे कई निर्णय स्वीकार किए जिनसे दवा कंपनियों को लाभ मिला और दवा विक्रेताओं के अधिकार कमजोर हुए। उन्होंने कहा कि डिस्काउंट में कटौती, एक्सपायरी दवाओं के क्लेम में कठिनाई, महंगी सप्लाई और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और बड़े नर्सिंग होम को सस्ती दवा उपलब्ध कराने जैसी समस्याओं पर संस्था कभी प्रभावी संघर्ष नहीं कर सकी।
जिला अध्यक्ष अतुल मोहन शर्मा ने कहा कि वर्तमान में एआईओसीडी के शीर्ष पदों पर ऐसे लोग बैठे हैं जो स्वयं दवा दुकानदार नहीं हैं। दवा कंपनियों से जुड़े कारोबारी हित रखते हैं। ऐसे लोग वास्तविक दवा विक्रेताओं की समस्याओं का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि दवा कंपनियों ने अपने हित साधने के लिए दवा विक्रेताओं के संगठनात्मक ढांचे पर प्रभाव स्थापित कर लिया है। इस अवसर पर चेयरमैन रविंद्र दुग्गल, जिला अध्यक्ष अतुल मोहन शर्मा, महामंत्री अरुण शर्मा, कोषाध्यक्ष राम अवतार तोमर सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
20 मई की बंदी पर उठाए सवाल, खुलेगा बाजार
- महामंत्री अरुण शर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों ने 20 मई को प्रस्तावित बाजार बंद पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवल एक दिन बाजार बंद कर देने से ऑनलाइन दवा बिक्री जैसी समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। यदि वास्तव में संघर्ष करना होता तो इसके लिए पहले से ठोस और चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाता। दवा विक्रेताओं और पदाधिकारियों से अपील की कि वे बाहरी दबावों से मुक्त होकर वास्तविक दवा विक्रेताओं के हितों की लड़ाई में शामिल हों। बाजार बंद करने से कोई हल नहीं निकल रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि दवा विक्रेताओं की अपनी स्वतंत्र, पारदर्शी और वास्तविक राष्ट्रीय संस्था का निर्माण किया जाए। इस दिशा में उत्तर प्रदेश से प्रयास शुरू हो चुका है और आने वाले समय में देशभर के दवा विक्रेताओं को इस अभियान से जोड़ने का कार्य किया जाएगा।