मेरठ। भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे जीआईएस सर्वे के आधार पर नगर निगम ने 6 दिन में 12 हजार से ज्यादा नए गृहकर के बिल वितरित कर दिए हैं। बढ़ा-चढ़ाकर भेजे गए बिल देखकर भवन स्वामी परेशान हैं। वह लगातार निगम में पहुंचकर आपत्तियां कर रहे हैं। भवन स्वामियों द्वारा दी जा रही आपत्तियों का भी निगम निस्तारण नहीं कर पा रहा है। जिसको लेकर लोगों में नगर निगम के प्रति आक्रोश है।
वार्ड-69 कोतवाली मुफ्तीवाड़ा निवासी निजामुद्दीन ने बताया कि उनका कुल 60 गज का मकान है। जिस पर करीब 200 रुपये के आसपास प्रतिवर्ष गृहकर आता है। कई साल से मकान में कोई निर्माण भी नहीं हुआ। नगर निगम के जीआईएस सर्वे ने अपने हिसाब से रिपोर्ट दी, उसके चलते नए गृहकर में 7985 रुपये का बिल भेजा गया है, जोकि सरासर गलत है। दूसरा मामला वार्ड-51 में सुमनपुरी मोहल्ला निवासी चंद्रपाल का है। उनके मकान का प्रतिवर्ष 903 रुपये गृहकर आता था। वर्ष 2024 तक वह लगातार गृहकर जमा कर रहे हैं।
निगम ने 2404 रुपया गृहकर लगाकर बिल भेजा है। यह एक-दो नहीं, हजारों ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। उनका निस्तारण करने का दावा भी फेल है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एसके गौतम ने बताया है कि जिन बिल पर आपत्तियां आ रही है, उनका निस्तारण कराया जा रहा है। शुक्रवार को शास्त्रीनगर, कंकरखेड़ा और मुख्यालय जोन पर समाधान दिवस लगाया जाता है। स्वकर प्रपत्र प्रणाली 100 प्रतिशत लागू कर दी है। आपत्तियों का निस्तारण के बाद ही भवन स्वामी नया गृहकर जमा करें।