नवनियुक्त आर्मी चीफ विपिन रावत।
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नए सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत का मेरठ से कनेक्शन है। उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से डिफेंस स्टडी विषय में पीएचडी की है। रिसर्च के दौरान यहां आना जाना रहा है। उनके सुपरवाइज का कहना है म्यांमार में एक्शन लेने और सर्जिकल स्ट्राइक में उनके अहम योगदान की वजह से सरकार की पहली पसंद बने हैं। लेफ्टिनेंट जनरल एक जनवरी को सेनाध्यक्ष का चार्ज संभालेंगे।
बिपिन रावत ने 2011 में सीसीएसयू से संबद्ध मेरठ कॉलेज के डिफेंस स्टडी डिपार्टमेंट से मिलिट्री मीडिया स्ट्रैटेजिक स्टडीज टॉपिक पर पीएचडी की। उनके सुपरवाइज यूजीसी के एमिरेटस प्रोफेसर हरवीर शर्मा थे। अहम बात यह है कि प्रो. हरवीर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह के भी सुपरवाइजर रहे हैं। प्रो. हरवीर बताते हैं कि बिपिन रावत ने जब पीएचडी शुरू की थी तो तब वह मेजर जनरल थे। फील्ड में वह जितने हुनरमंद हैं, एकेडमिक में भी उतरे प्रतिभाशाली हैं। प्रो. हरवीर ने बताया म्यांमार में भारतीय सैनिकों के साथ बर्बर व्यवहार होने के बाद उसी अंदाज में जवाब देने वालों में लेफ्टिनेंट जनलर बिपिन रावत शामिल थे। म्यांमार में घुसकर सेना ने जवाबी कार्रवाई की थी। हाल में पाकिस्तान की सीमा में घुसकर हुई सर्जिकल स्ट्राइक में लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत का अहम योगदान रहा। जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात को देखते हुए वह सबसे फिट अफसर हैं। फील्ड और एक्शन का उनका लंबा अनुभव है। यही वजह है कि वह सरकार की पसंद बने। बिपिन रावत ने एमफिल देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी इंदौर से की। एकेडमिक में नेशनल सिक्योरिटी और लीडरशिप पर कई लेख लिखे हैं।