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न चीरा न ऑपरेशन...400 हाथों को मिला नया जीवन

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न चीरा न ऑपरेशन, 400 हाथों को मिला ‘नया जीवन’
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मेरठ। न हाथ में चीरा लगा, न कोई ऑपरेशन हुआ और लग गया कृत्रिम हाथ। इस हाथ से ब्रश किया जा सकता है, कप उठाकर चाय पी सकते हैं, साइकिल चला सकते हैं और हल्का वजन भी उठा सकते हैं। जिनका हाथ कोहनी के चार इंच नीचे से कटा हुआ था, उनके लिए रविवार को दिल्ली रोड स्थित सांगरिया होटल में निशुल्क शिविर लगाया गया। इसमें 400 जरूरतमंदों को कृत्रिम हाथ लगाए गए। उनसे चम्मच उठवाकर और लिखवाकर भी देखा गया। हाथ लगने पर दिव्यांग बोले, ऐसा लग रहा है हाथ को नया जीवन मिल गया।
शिविर रोटरी क्लब मेरठ विराट और रोटरी क्लब जामनगर के संयुक्त तत्वावधान में लगाया गया। प्रोजेक्ट चेयरमैन प्रियांशु जैन ने बताया कि यह एलएन-4 हाथ है, जो सहज, सरल और मजबूत है। आसानी से लगाया जा सकता है। इसके लिए जरूरी यह है कि कोहनी के नीचे कम से कम चार इंच मूल हाथ का हिस्सा होना चाहिए। तभी इसे फिट किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को यह हाथ फिट नहीं बैठा, लेकिन कोशिश रही कि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों को इसका लाभ मिले। कैलिफोर्निया के कुछ रोटरी क्लब के साझे प्रयासों से यह संभव हो पाया। पिछले 12 सालों में 80 देशों के करीब 52 हजार लाभार्थियों तक यह हाथ निशुल्क पहुंच चुका है।
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शिविर के मुख्य अतिथि रोटरी अंतरराष्ट्रीय निदेशक डॉ. भरत पांड्या और विशिष्ट अतिथि मंडलाध्यक्ष हरि गुप्ता रहे। डॉ. भरत पांड्या ने कहा कि कृत्रिम हाथ के जरिए जरूरतमंदों को जीने की आशा और खुशियां देने की कोशिश की गई। इस दौरान दीपक गुप्ता, मनीष शारदा, राजीव सिंघल, एमएस जैन, योगेश मोहन गुप्ता, समीर अग्रवाल, अमरीश जैन, राजीव गुप्ता, योगेश गुप्ता, अशोक सिंघल और अंकित गोयल आदि रहे।
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10 से ज्यादा जिलों से आए लोग
कृत्रिम हाथ लगवाने के लिए 10 से ज्यादा जिलों के लोगों ने आवेदन किया था। इनमें मेरठ के अलावा अमरोहा, मुरादाबाद, सहारनपुर, रामपुर, बुलंदशहर, हापुड़, मुजफ्फरनगर, बागपत और शामली आदि जिले से लोग आए और लाभ उठाया।
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