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मलिन बस्ती से न गृहकर आएगा और न वहां पर निगम विकास कराएगा

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- सपा, बसपा, मुस्लिम लीग सहित विपक्ष पार्षदों ने निगम का प्रस्ताव ठुकराया
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- विकास कार्यों में भेदभाव करने की विपक्ष के पार्षद कमिश्नर से करेंगे शिकायत

माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। मलिन और अल्पसंख्यक बस्ती में सफाई व्यवस्था, विकास कार्य कराने की बजाय नगर निगम वहां से गृहकर कम आने का रोना रहा है। जबकि योगी सरकार का फोकस मलिन बस्ती में ज्यादा विकास कार्य कराना है। निगम अफसर कहते हैं कि जितना गृहकर आएगा, उसके वार्ड में उतनी ही धनराशि से विकास कार्य करेंगे। इसको लेकर सपा, बसपा, मुस्लिम लीग सहित विपक्ष के पार्षदों ने निगम का प्रस्ताव ठुकरा दिया। निगम अफसरों की शिकायत कमिश्नर से करने की बात कही है।
नगर निगम की बुधवार को बोर्ड बैठक में भाजपा पार्षद अनुज वशिष्ठ ने नए गृहकर पर आपत्ति जताकर पुराने गृहकर पर वसूली करने का प्रस्ताव पास कराया। विपक्ष के पार्षदों ने मलिन बस्ती और लघु उद्योग पर व्यावसायिक गृहकर लगाने पर नाराजगी जताई। नगर आयुक्त ने वार्ड-76 और वार्ड-72 सहित कई मुस्लिम बहुल इलाके के वार्डों से आने वाले गृहकर की वसूली और वहां विकास कार्यों पर खर्च किए धनराशि सदन में बतानी शुरू की। बसपा के पार्षद आशीष चौधरी ने महापौर और नगर आयुक्त से पूछा कि क्या गृहकर की वसूली कराने व उसको बढ़ाने का काम भी पार्षदों का है।
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सपा पार्षद कहकशां ने कहा कि मलिन और अल्पसंख्यक बस्ती में रहने वाले लोग निगम को कहां से गृहकर देंगे। सफाई व्यवस्था और सड़क निर्माण न होने पर बीमारियों होने का खतरा भी उनके वार्ड में सबसे ज्यादा है। मुस्लिम लीग की पार्षद रिजवान अंसारी का कहना है कि जितना गृहकर, उतना विकास कार्य कराने का भाजपा पार्षदों द्वारा दिए प्रस्ताव को सभी विपक्ष पार्षदों ने ठुकरा दिया हैं। एआईएमआईएम के पार्षद फजल करीम ने बताया है कि सदन में विपक्ष के पार्षदों को बोलने नहीं दिया जाता। गृहकर वसूली के नाम पर लोगों को लूटा जा रहा है। मलिन व अल्पसंख्यक बस्ती में रहने वाले लोग कैसे गृहकर देंगे। कमिश्नर से इसकी शिकायत करेंगे।
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पुराने गृहकर पर वसूली करें निगम
सदन में भाजपा पार्षदों ने निगम की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखा था कि पुराने गृहकर पर ही भवन स्वामियों से वसूली की जाएगी। नए गृहकर के बिल वितरित न हो और न ही अभी उन बिल के आधार पर वसूली की जाए। पहले छूटे हुए भवनों से गृहकर लें, भवनों को सत्यापन करें और 100 फीसदी स्वकर निर्धारण प्रपत्र प्रणाली लागू करके डोर-टू-डोर भवन स्वामियों को समझाया जाएं। उसके बाद ही नए गृहकर की वसूली को लेकर बैठक में चर्चा करेंगे।
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