सदर स्थित भगवान बुक पैलेस के स्वामी सतेंद्र शर्मा के पुत्र अमित और उनके कार चालक राहुल का शव करनाल नहर से बरामद कर लिया गया। बृहस्पतिवार दोपहर सतेंद्र, अमित और राहुल के शव मेरठ पहुंचे तो परिजनों में कोहराम मच गया। तीनों शवों का नम आंखों के बीच अंतिम संस्कार किया गया।
सदर बाजार स्थित भगवान बुक पैलेस के मालिक सतेंद्र शर्मा सर्वाइकल से परेशान अपने बेटे अमित शर्मा को करनाल में डॉक्टर को दिखाने के लिए बुधवार को कार से गए थे। कार में सतेंद्र की पत्नी पुष्पा भी थीं। जबकि कार बेगमबाग निवासी उनका ड्राइवर राहुल चला रहा था। करनाल स्थित मूनक रिफाइनरी नहर के पास पीछे से आ रहे अज्ञात वाहन ने कार में जोरदार टक्कर मार दी थी। जिस पर कार नहर में जा गिरी थी। हादसे के दौरान लोगों ने पुष्पा को तो बचा लिया था। लेकिन कार की अगली सीट पर फंसे रह गए सतेंद्र की मौत हो गई थी। जबकि अमित और राहुल नहर में बह गए थे।
आठ किमी दूर मिला शव
हरियाणा पुलिस के अनुसार नहर में बहाव इतना तेज था कि अमित और राहुल काफी दूर बह गए थे। जबकि सतेंद्र शर्मा सीट बेल्ट लगाने के चलते कार में ही फंसे रह गए थे और वहीं पर ही उनकी मौत हो गई थी। उनकी पत्नी पुष्पा कार से बाहर निकली तो उन्हें बचा लिया गया था। नहर में खोजबीन के दौरान राहुल का शव घटनास्थल से करीब तीन किलोमीटर तो अमित का शव करीब आठ किलोमीटर दूर मिला।
शव पहुंचते ही मचा कोहराम
सतेंद्र और अमित का शव बृहस्पतिवार दोपहर करीब 2:30 बजे उनके पल्लवपुरम फेज-2 जे पॉकेट स्थित आवास पर तो राहुल का शव बेगमबाग पहुंचा। शव पहुंचते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया।
पति और बेटे के बिना मैं क्या करूंगी
पुस्तक व्यापारी की पत्नी पुष्पा भी घायल अवस्था में पल्लवपुरम स्थित आवास पर पहुंची। पति और बेटे की मौत पर बदहवास पुष्पा कभी शून्य में निहारती तो कभी दहाड़े मारकर रो पड़तीं। बार-बार यहीं कह रही थीं कि मेरा पति और बेटा चला गया, अब मैं जीकर क्या करूंगी। भगवान मुझे भी अपने पास बुला लेता। मेरे पति और बेटे को बचा देता। अब तो जिंदगी भर उनकी याद ही शेष रह जाएगी। उस हादसे को याद कर वह सिहर उठतीं। बिलखते हुए कहतीं कि पता नहीं था कि एक पल में ही सब कुछ लुट जाएगा। रुंधे गले से पुष्पा बोलीं कि एक झटके में सब कुछ खत्म हो गया। उनकी हालत देखकर वहां मौजूद परिजन, रिश्तेदार और स्थानीय लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाए।
हे भगवान! तूने ये क्या कर दिया
ससुर सतेंद्र और पति अमित का शव देखते ही तारा बेहोश हो गई। परिजनों ने उन्हें किसी तरह संभाला। होश में आने पर तारा रोते हुए बोलीं कि हे भगवान! तूने से क्या किया। मुझसे मेरे सुहाग के साथ ही पिता तुल्य ससुर को भी छीन लिया। अब मैं कैसे रहूंगी। मुझे तो बस एक्सीडेंट के बारे में ही पता था। मेरे तो घर की खुशियां ही छिन गई। भगवान तूने ऐसा क्यों किया। बच्चों को अब कौन प्यार करेगा। गौरी भी तुम्हें बहुत याद करेगी। अमित तुम वापस आ जाओ। यही हाल सतेंद्र के पुत्र प्रवीन, विवेक, संजय उर्फ संजू और बेटी स्वाति व निशा का था। अपने पिता और भाई को खोने पर उनकी आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे।
पापा और दादू कहां चले गए?
अमित ने अपनी लाडली सात साल की बेटी गौरी का एक सप्ताह पूर्व ही दयावती मोदी अकादमी प्रथम में एडमिशन कराया था। जिसके चलते स्कूल में भी शोक का माहौल रहा। घर में मचे कोहराम के बीच मासूम गौरी सभी को बिलखता देख खुद भी रोते हुए पूछ रही थी कि पापा और दादू कहां चले गए?। अमित का एक साल का बेटा भी है जिसे प्यार से सभी छोटू कहते हैं।
सांत्वना देने पहुंचे लोग
भगवान बुक पैलेस के मालिक सतेंद्र और उनके पुत्र अमित की मौत पर सदर बाजार में भी शोक का माहौल रहा। वहीं, उनके पल्लवपुरम और रुड़की रोड स्थित शांति निकेतन कालोनी स्थित आवास पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। पल्लवपुरम में भाजपा मंडल महामंत्री विक्रांत ढाका, विजय शर्मा, डीएमए प्रथम के उपप्रधानाचार्य राजीव ढाका समेत अन्य लोग पहुंचे। वहीं, पिता-पुत्र का शव सदर बाजार में भी लाया गया। उसके बाद सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट पर दोनों का अंतिम संस्कार हुआ। सूरजकुंड पर भी भाजपा नेता अरुण वशिष्ठ, पार्षद सुनील समेत अन्य लोग पहुंचे।